काॅमर्स व आर्ट्स के दो-दो व साइंस के एक प्रवक्ता का पद खाली होने से बढ़ी दिक्कतें
एसएमसी ने सरकार पर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की उपेक्षा का करने का लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल गोयला में स्टाफ की कमी विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता का कारण बनी हुई है। वाणिज्य और विज्ञान विषयों के प्रवक्ता न होने से आठ विद्यार्थियों ने दूसरे स्कूलों में दाखिला ले लिया है। यदि यही स्थिति बनी रही तो यहां वाणिज्य और विज्ञान की कक्षाएं बंद होने का खतरा है। स्कूल में कुल पांच प्रवक्ता पद रिक्त पड़े हैं। स्कूल में वाणिज्य के दोनों पद खाली हैं। विज्ञान संकाय में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता का पद भी रिक्त है। कला संकाय में इतिहास और राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। सितंबर 2006 में गोयला स्कूल को दसवीं से जमा दो तक उन्नत किया गया था। तब से ही यहां कला, वाणिज्य और विज्ञान तीनों विषय पढ़ाए जा रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण आठ विद्यार्थी पट्टा, चंडी और दिग्गल के स्कूलों में चले गए हैं।
एसएमसी के प्रधान गुरुदेव वर्मा ने सरकार पर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अध्यापक राजनीतिक दबाव बनाकर अपनी मर्जी के स्कूलों में स्थानांतरण करवा लेते हैं। स्थानांतरण होने पर इन अध्यापकों को बिना स्थानापन्न अध्यापक के ही कार्यमुक्त कर दिया जाता है। इससे ग्रामीण स्कूलों में स्टाफ की कमी बनी रहती है। वर्मा ने आशंका जताई कि लगातार अध्यापकों के पद खाली रहने से सरकार इन विषयों को समाप्त प्राय संवर्ग में डाल देगी। इससे ये विषय हमेशा के लिए यहां से बंद हो जाएंगे।
गोयला स्कूल में वाणिज्य संकाय के दोनों प्रवक्ता पद रिक्त हैं। विज्ञान संकाय में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता का पद भी खाली है। कला संकाय में इतिहास और राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता के पद भी लंबे समय से भरे नहीं गए हैं। कुल मिलाकर पांच महत्वपूर्ण प्रवक्ता पद खाली पड़े हैं। इन पदों के खाली रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। विशेषकर वाणिज्य और विज्ञान के छात्रों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
कोट
इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जैसे ही नई नियुक्तियां होती हैं, गोयला स्कूल को प्राथमिकता दी जाएगी।
जगदीश चौहान, उपनिदेशक,शिक्षा विभाग