बोले छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए जटिल होगी यह प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। ड्रग मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस के अनुदान या नवीनीकरण के लिए फायर एनओसी को अनिवार्य बनाए जाने पर उद्योग जगत ने आपत्ति जताई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर वर्तमान औद्योगिक नीति में सुधार की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर का कहना है कि फायर एनओसी और ड्रग लाइसेंस दो अलग-अलग विभागों के तहत आते हैं, ऐसे में दोनों को आपस में जोड़ना व्यावहारिक नहीं है। संगठन के अनुसार छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल होगी।
पत्र में यह भी मांग की गई कि 500 वर्गमीटर और 1000 वर्गमीटर के औद्योगिक प्लॉट्स के लिए अलग-अलग फायर पॉलिसी लागू की जाए, ताकि उद्योगों पर अतिरिक्त प्रशासनिक और आर्थिक बोझ न पड़े। वर्तमान औद्योगिक नीति काफी जटिल है, जिसको पूरा करना लघु उद्योगों के लिए आसान नहीं है, जिससे नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के संचालन में कठिनाइयां आ रही हैं। संगठन का मानना है कि फायर एनओसी को बीमा (इंश्योरेंस) के लिए अनिवार्य रखा जाना उचित है। यह सुरक्षा से जुड़ा विषय है, लेकिन अन्य लाइसेंस प्रक्रियाओं से इसे अलग रखा जाना चाहिए।
फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के राज्य अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने कहा कि यदि औद्योगिक नीतियों को सरल और उद्योग-अनुकूल बनाया जाए तो राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से उद्योग हित में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।