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Solan News: बद्दी के मलकूमाजरा में रजिस्ट्री और इंतकाल पर उठने लगे सवाल

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धारा-118 की कार्रवाई के दायरे में आ सकते है राजस्व विभाग के अधिकारी
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2007 में खरीदी गई थी भूमि, 2020 में कैसे बिकने लगे इसमें प्लॉट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बद्दी के मलकूमाजरा में धारा-118 उल्लंघन का बेचे गए करीब 70 प्लॉटों की रजिस्ट्री व इंतकाल पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जिसने भी यह इंतकाल किए उन राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। जब यहां पर धारा-118 का उल्लंघन था तो यहां पर इंतकाल कैसे हुए, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
बिल्डर ने धारा 118 की कार्रवाई के दायरे में आई भूमि के प्लॉट बनाकर बेच दिए। अधिकांश प्लॉट की रजिस्ट्री वर्ष 2020 से वर्ष 2023 के बीच में हुई है। इससे पूर्व भी कुछ प्लॉट की रजिस्ट्री हुई है। हिमाचल प्रदेश मुजारा एवं भू-सुधार अधिनियम 1972 की धारा 118 के तहत खरीदी गई भूमि को लेकर नियम स्पष्ट हैं कि दो वर्ष के अंदर जिस उद्देश्य के लिए भूमि को खरीदा गया है, उसके लिए इसे उपयोग में लाना अनिवार्य है। जब वर्ष 2020 में रजिस्ट्रियां हो रही हैं तो उससे स्पष्ट है कि भूमि को करीब 13 वर्षों में उपयोग में नहीं लाया गया। फिर कैसे इन प्लॉट की रजिस्ट्री व इंतकाल हो गए। विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण अब उन परिवारों के सड़क पर आने की नौबत आ गई जिन्होंने इन प्लॉटों पर मकानों का निर्माण कर दिया है। ऐसे करीब 45 परिवार हैं जिन्होंने पहले लाखों रुपये में 3-3 बिस्वा प्लॉट खरीदे और फिर बैंक से ऋण लेकर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च कर मकान का निर्माण किया। यदि इन प्लॉट की तहसील में रजिस्ट्रियां नहीं होतीं तो वे उसे खरीदते ही नहीं। उपायुक्त की अदालत के फैसले के बाद उनके पैरों के तले जमीन खिसक गई है।
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बड़ी बात यह है कि इसी रजिस्ट्री के आधार पर भी खरीदारों को मकान के निर्माण के लिए बैंकों से ऋण भी मिल गए। संबंधित अथॉरिटी से मकान का नक्शा स्वीकृत होने के बाद लोगों ने तीन से चार मंजिला मकान का निर्माण कर दिया। उधर उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा का कहना है कि मामले में जांच की जाएगी कि इसमें गड़बड़ी कहां हुई है।
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