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जिला के 17 नशा मुक्ति केंद्रो पर न विशेषज्ञ नहीं पूरी सुविधाएं

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सोलन। जिले में नशा छुड़वाने वाले 17 केंद्र नियमों की सरेआम अवहेलना कर रहे हैं। इन केंद्रों पर न तो मनो चिकित्सक हैं और न ही कोई विशेषज्ञ हैं। इससे नशा छुड़ाने आ रहे युवाओं को पूरी तरह से केंद्रों में सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसका खुलासा नशा मुक्ति केंद्रों की जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम ने किया है। वहीं, टीम ने इसकी रिपोर्ट तैयार कर स्टेट मेंटल अथॉरिटी को भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। संबंधित केंद्रों को नोटिस भी जारी कर दिए हैं। इसमें एक माह में पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। एक माह के बाद टीम दोबारा से निरीक्षण करेंगी। इस दौरान कोताही बरतने पर लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा।
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गौर रहे कि जिले के सोलन मुख्यालय समेत धर्मपुर, परवाणू, बद्दी, नालागढ़, बरोटीवाला, वाकनाघाट आदि जगहों पर नशा निवारण केंद्र खुले हुए हैं। इन केंद्रों पर किस प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं, इसे देखने के लिए टीम का गठन किया गया है। इसमें संबंधित क्षेत्र के उपमंडल अधिकारी, डीएसपी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला प्रोग्राम अधिकारी शामिल थे। टीम ने करीब 17 नशा मुक्ति केंद्रों का औचक निरीक्षण कर लिया है। इन केंद्रों पर जब टीम ने दबिश दी तो मौके पर कई प्रकार की असुविधाएं पाई गई। इसमें असुविधाओं को देखकर टीम की ओर से रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट में कई प्रकार की जानकारियां साझा भी की गई हैं। उन सुविधाओं की पूर्ति के लिए भी टीम ने रिपोर्ट में कहा है और स्टेट मेंटल अथॉरिटी ने नोटिस में भी सभी बिंदुओं को लिखा है।
उधर, निरीक्षण के बाद जिला प्रोग्राम अधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि नशा निवारण केंद्र की दिनचर्या सुबह उठते ही योगा, व्यायाम, हल्का खाना, मेडिटेशन, दैनिक विचार, दवाइयां और फिर स्टाफ नर्स की ओर से निरीक्षण होना चाहिए, लेकिन जिले के नशा मुक्ति केंद्रों में कई प्रकार की अनियमितताएं पाई गई हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्रों के निरीक्षण के लिए टीम बनाई गई थी। जिले के 17 नशा निवारण केंद्रों में निरीक्षण किया गया। सभी केंद्रों में कमियां पाई गई। इसकी रिपोर्ट बनाकर स्टेट मेंटल अथॉरिटी को भी भेज दी गई है।
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करीब 400 पीड़ित करवा रहे उपचार
जिले में वर्तमान में करीब 400 से अधिक पीड़ित नशा छोड़ने के लिए अपना इलाज नशा निवारण केंद्रों पर करवा रहे हैं। इन केंद्रों में फीस भी काफी अधिक ली जा रही है। निरीक्षण के दौरान पता चला कि नशा निवारण केंद्र में लोगों से प्रति महीना 10000 से 40000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। ऐसे में नशा छुड़वाने का इलाज करीब आठ माह तक चलता है। सुविधाएं न मिलने पर सभी पैसे व्यर्थ हो रहे हैं।
लाइसेंस भी नहीं हुए रिन्यू
विशेष जांच टीम के निरीक्षण के दौरान 13 नशा मुक्ति केंद्रों के लाइसेंस भी रिन्यू नहीं हुए हैं। वहीं हैरत की बात तो यह है कि मनोचिकित्सक फोन कॉल पर उपलब्ध हो रहे हैं। इस पर टीम काफी असंतुष्ट दिखी। एमबीबीएस डॉक्टर के अलावा स्टाफ नर्स, योगा टीचर, सोशल वर्कर, काउंसिलर की कमी भी पाई गई।
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