सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों से 7 दिन साथ देने की अपील
संघर्ष समिति ने सरकार से संवाद कर समाधान निकालने की मांग उठाई
सात दिवसीय आंदोलन की रूपरेखा का ऐलान जल्द
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। एंट्री टोल संघर्ष समिति एवं पंजाब मोर्चा के कन्वीनर गौरव राणा ने कहा कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश के लोगों के बीच सदियों पुराना भाईचारा, प्रेम और सामाजिक सांझ आज भी पूरी मजबूती के साथ कायम है। इसके बावजूद सत्ता पर काबिज सरकारों की संकीर्ण सोच लोगों को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर रही है। हिमाचल प्रदेश में वसूला जा रहा एंट्री टैक्स सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों व पर्यटकों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है।
राणा ने कहा कि यदि पंजाब और हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासी सात दिनों के लिए एकजुट होकर जनहित संघर्ष का साथ दें तो एंट्री टैक्स जैसी विवादित व्यवस्था को इतिहास का हिस्सा बनाया जा सकता है। यह लड़ाई किसी राज्य या वहां के लोगों के खिलाफ नहीं, बल्कि आम जनता पर डाले जा रहे अनुचित आर्थिक बोझ के खिलाफ है। पंजाब और हिमाचल के लोग वर्षों से एक-दूसरे के सुख-दुख के सहभागी रहे हैं व दोनों राज्यों के बीच भाईचारे की मजबूत परंपरा रही है। इसलिए ऐसी किसी भी नीति को जारी रखना, जो लोगों के बीच अनावश्यक नाराजगी पैदा करे, दोनों राज्यों के हित में नहीं है।
गौरव राणा ने बताया कि आने वाले दिनों में एंट्री टैक्स के खिलाफ चलाए जाने वाले अंतिम सात दिवसीय संघर्ष कार्यक्रम की तिथि तथा विस्तृत रूपरेखा की घोषणा की जाएगी। उन्होंने पंजाबियों व हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से इस संघर्ष में एकजुट होकर अपनी भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संयमित तरीके से चलाया जाएगा। यात्रियों, पर्यटकों और आम लोगों को किसी प्रकार की घबराहट की आवश्यकता नहीं है। हिमाचल सरकार के पास अवसर है कि वह संघर्षरत संगठनों के साथ तुरंत बात करे।