हिमाचल के मिल मालिकों ने गत्ता उद्योग की तीन दिवसीय हड़ताल को दरकिनार करते हुए एक बार फिर से कागज के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
हिमाचल के मिल मालिकों ने गत्ता उद्योग की तीन दिवसीय हड़ताल को दरकिनार करते हुए एक बार फिर से कागज के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। कालाअंब स्थित एक उद्योग ने तो बुधवार को पेपर में 50 पैसे प्रति किलो की दर से बढ़ोतरी भी कर दी है। वहीं अन्य मिलों द्वारा भी दामों में आगामी दिनों में बढ़ोतरी की तैयारी है।
दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में मौजूद छह पेपर मिलें 10 दिन के भीतर कागज की कीमतों में डेढ़ रुपये प्रतिकिलो के हिसाब बढ़ोतरी कर सकती हैं। इस संबंध में मिल मालिकों की ओर से प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने का हवाला दिया जा रहा है। संपूर्ण उत्तर भारत की पेपर मिलों की ओर से एक माह के भीतर मिल पेपर के दामों में 2.50 रुपये तक की बढ़ोतरी की जा चुकी है।
मिल मालिकों की पेपर के दामों में इस तरह की बढ़ोतरी को प्रदेश सहित उत्तर भारत का गत्ता उद्योग मनमानी कदम बता रहा है। कागज के दाम बढ़ने से हिमाचल में सेब के डिब्बों की कीमत बढ़ना भी तय है। इसे हजारों बागवान प्रभावित होंगे।
मिल मालिकों की मनमानी पर हड़ताल
हिमाचल प्रदेश गत्ता उद्योग संघ के चेयरमैन गगन कपूर ने कहा कि 21 से 23 अप्रैल तक मिल मालिकों की इस मनमानी के विरोध में हड़ताल रखी है। इस दौरान मिलों के कच्चे माल को कोई भी उद्योग अनलोड नहीं करेगा ओर न ही उद्योगों के तैयार माल की सप्लाई होगी। कहा कि पेपर के दामों को बिना किसी फार्मूले के बढ़ाया जा रहा है।
पेपर प्रोडक्शन की लागत बढ़ी
औद्योगिक क्षेत्र बददी की भंडारी पेपर मिल के मालिक दीपक भंडारी ने कहा कि कच्चे माल के दाम और अन्य लागतों में बढ़ोतरी के चलते 1.50 रुपये प्रतिकिलो की दर से पेपर के दामों में बढ़ोतरी की जा सकती है। कहा कि पेपर की लागत महंगाई के चलते बढ़ती जा रही है।
ऐसे में मिल से तैयार हो रहे पेपर की कीमत को भी बढ़ाया जा रहा है। कहा कि मल्टी नेशनल कंपनियों के साथ गत्ता उद्योग प्रतिस्पर्धा के चलते कम दामों पर अपना माल बेच रहे हैं। उद्योगों को स्वयं अपने दामों को एक समान रखने के लिए एकजुट होना होगा।