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Solan News: पलासड़ा में उद्योग पर प्रदूषण फैलाने के आरोप, ग्रामीणों ने अदालत जाने की दी चेतावनी

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नालागढ़ के नंगल में कंपनी की ओर फैल रहे प्रदूषण को लेकर रोष जताते हुए ग्रामीण- संवाद।
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कहा-उद्योग प्रबंधन को अवगत कराने के बाद भी कम नहीं हुआ प्रदूषण
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हिम परिवेश संस्था के बैनर तले ग्रामीणों ने बैठक में बनाई रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। हिम परिवेश संस्था के बैनर तले ग्रामीणों ने पलासड़ा में स्थापित एक उद्योग पर प्रदूषण फैलाने के आरोप लगाए हैं। इस मुद्दे को लेकर नंगल में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने उद्योग के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान किया। साथ ही जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी चेतावनी दी। बैठक की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष लक्ष्मी चंद ने की। उन्होंने कहा कि पलासड़ा में उद्योग लगने के बाद से पलासड़ा, सैरी, रडियाली, चुहूवाल, सौड़ी भूमिया, नंगल और गोल जमाला समेत करीब एक दर्जन गांव प्रदूषण की चपेट में हैं। आरोप है कि उद्योग रात के समय जहरीली गैस छोड़ रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि उद्योग को प्रतिदिन छह से सात लाख लीटर भूजल दोहन की अनुमति है, जिससे क्षेत्र के प्राचीन जलस्रोत सूख गए हैं। उन्होंने बताया कि चार माह पहले कंपनी प्रबंधन के साथ हुई बैठक में प्रदूषण कम करने और ग्रामीणों की मांगें मानने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे लोगों में भारी रोष है। संस्था के सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि फिलहाल उद्योग 10 फीसदी क्षमता पर चल रहा है। यदि पूरा प्लांट संचालित हुआ तो 10 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रभावित होगा। उनका आरोप है कि प्लांट स्थापित करते समय प्रदूषण नियंत्रण के मानकों को नजरअंदाज किया गया। पूर्व प्रधान इंदू वैद्य ने बताया कि सैरी गांव में दो दर्जन से अधिक लोग सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। सौढ़ी घनसोत में जल स्तर गिरने से ट्यूबवेल सूख चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण उद्योगों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यदि उद्योगों से लोगों के जीवन पर खतरा मंडराए तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने लोगों से राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की। हंडूर संस्था के अध्यक्ष मोहन शर्मा ने आरोप लगाया कि कोरोना काल के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बंद कमरे में कंपनी को एनओसी जारी कर दी, जबकि नियमों के अनुसार जनसुनवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे और इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी की जा रही है। संस्था के सदस्य गुरचरण सिंह चन्नी ने कहा कि क्षेत्र में पहले ही लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं और उद्योग के प्रदूषण से हालात और बिगड़ रहे हैं। उन्होंने सभी ग्रामीणों से एकजुट होकर निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया। बैठक में बाल किशन शर्मा, रडियाली के प्रधान छोटू राम, श्रवण चंदेल, आशुतोष वैद्य, नरेश घई, नराता राम, किसान कांग्रेस के अध्यक्ष रवि शर्मा, जगजीत सिंह, पिंकी राणा, हुसन ठाकुर, देवराज सिंह, यशवंत सिंह, हरदीप सिंह, गुरचरण सिंह, अदित कंसल, प्रो. रणजोध सिंह, प्रो. सतविंद्र सिंह, यशपाल सिंह, कैलाश राणा, नराता राम ठाकुर समेत कई महिलाएं मौजूद रहीं।
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संघर्ष समिति का होगा गठन
ग्रामीणों ने जल्द ही एक संघर्ष समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इसमें सभी प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। समिति उद्योग के खिलाफ प्रदर्शन करेगी और कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।
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