निजी ऑक्सीजन प्लांट से भरे जा रहे ऑक्सीजन सिलिंडर
प्लांट बंद होने से अस्पताल पर पड़ा अतिरिक्त आर्थिक बोझ
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। सिविल अस्पताल नालागढ़ में कोरोना काल के बाद ऑक्सीजन प्लांट बंद हो गया है। इसके चलते काफी परेशानी आ रही है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन सिलिंडरों से काम चला रहा है। वहीं सिलिंडरों को बरोटीवाला में लगे निजी प्लांट से भरवाया जा रहा है। ऐसे में खर्च भी बढ़ गया है। सिलिंडरों को भरवाने के लिए अस्पताल प्रशासन सप्ताह में दो बार गाड़ी भेज रहा है। ऑक्सीजन प्लांट के चलने से सिलिंडरों की उठान और लदान खत्म हो गया था। क्योंकि प्रत्येक बिस्तर को ऑक्सीजन लाइन से जोड़ा गया था।
सिविल अस्पताल नालागढ़ में कोरोना काल में केंद्र सरकार ने पीएम केयर फंड से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए थे। इनमें 1000 एलपीएम आक्सीजन प्रति मिनट तैयार होती है। कोरोना काल के दौरान लोगों को इस प्लांट का काफी फायदा मिला। लेकिन अब प्लांट रखरखाव के अभाव में बंद हो गया। अस्पताल प्रशासन ने सरकार और उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा। वहीं कोरोना काल में प्लांट को चलाने के लिए आउटसोर्स में दो कर्मचारियों को भी तैनात किया गया था, जिन्हें वर्तमान में हटा दिया गया है।
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प्रतिमाह लगते हैं 50 से 60 सिलिंडर
नालागढ़ अस्पताल में 50 से 60 सिलिंडर प्रति माह लगते हैं। अस्पताल प्रशासन यह सब बरोटीवाला की एक कंपनी से लेता है। ऐसे में प्रति माह अस्पताल पर खर्चा बढ़ रहा है। नालागढ़ विकास मंच के अध्यक्ष नरेश घई ने कहा कि निजी कंपनी ने अस्पताल को लाखों रुपये की कीमत के ऑक्सीजन प्लांट दिए। इससे कोरोना रोगियों के अलावा अन्य रोगियों को इसका फायदा भी हुआ। लेकिन अब यह प्लांट रखरखाव के अभाव में खराब हो गए है।
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ऑक्सीजन प्लांट निजी कंपनी ने दिए थे। सरकार के अधीन करने के लिए पत्र भेजा गया था लेकिन अभी तक सरकार ने इसे अपने अधीन नहीं किया है। प्लांट के रखरखाव के लिए भी उन्होंने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है।
-डॉ. मुक्ता रस्तोगी
खंड चिकित्सा अधिकारी, नालागढ़