बंद पड़ी मंडी बनी प्रवासी कामगारों की शरण स्थली
40 लाख रुपये की लागत से हुआ था मंडी का निर्माण कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। दून विधानसभा क्षेत्र की दाड़वा पंचायत के बनलगी में एक साल पूर्व खोली गई प्रदेश की पहली हर्बल मंडी बंद हो गई है। इसको लेकर क्षेत्र के हजारों किसानों में मायूसी है। मात्र दो महीने तक इस मंडी में एक आढ़ती की ओर से जड़ी बूटियों की खरीद फरोख्त की गई, लेकिन इस मंडी में अब ताले लटके हुए हैं। मंडी अब प्रवासी लोगों की शरण स्थली बनी हुई है।
पूर्व की भाजपा सरकार के समय 40 लाख रुपये की लागत से बनी इस सब्जी मंडी का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने किया गया था। शुरू के कुछ सालों तक यहां स्थानीय किसानों ने अपनी नकदी फसलें बेचीं, लेकिन मार्केटिंग बोर्ड की उपेक्षा और आढ़तियों के लगातार दुकानें न खोलने की वजह से यहां सब्जियों का कारोबार बंद हो गया था। मार्केटिंग बोर्ड ने यहां पर हर्बल मंडी खोलने का निर्णय लेकर एक स्थानीय आढ़ती को किसानों के औषधीय पौधों को खरीदने की पहल की, लेकिन कुछ ही महीनों बाद इसमें ताले लग गए, जो कि आम आदमी की समझ से परे है।
मंडी बंद होने का मुख्य कारण माना जा रहा है कि किसानों को उनके उत्पादों का भुगतान समय पर नहीं हुआ। अब इस मंडी में प्रवासियों ने डेरा जमा लिया है। मंडी परिसर में जगह-जगह घास और काई का साम्राज्य है। इसकी सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार की ईंटें लोग निकाल कर ले गए हैं। मंडी परिसर के चारों ओर गंदगी का आलम है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। दाड़वा पंचायत के प्रधान रमेश कुमार ने कहा कि लाखों रुपये की लागत से बनाई गई मंडी का किसी भी रूप में किसानों को लाभ नहीं हुआ। उल्टा जनता के पैसे की बरबादी हुई। विभाग को इस मंडी को कामयाब करने की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। उधर, कृषि उपज मंडी समिति सोलन के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि पिछले चार माह से यहां पर जुड़ी बूटियां नहीं आ रही हैं। इसके चलते वर्तमान में यहां पर कोई स्टाफ नहीं है। यह मंडी अभी बंद नहीं की गई है। जैसे ही यहां पर जड़ी बूटियां आनी शुरू होंगी तो उसे चालू कर दिया जाएगा।