शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को जारी किए निर्देश
सोलन के सरकारी स्कूलों में लागू होगी अभिनव अल्फा
रटने के बजाय गतिविधियों और खेलों से करवाई जाएगी पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों में रटने की आदत को पूरी तरह खत्म करने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल की है। अब सरकारी विद्यालयों में 9 वर्ष तक की आयु के हर विद्यार्थी को आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) में सक्षम बनाने के लिए अल्फा पद्धति का सहारा लिया जाएगा।
इसके साथ ही पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए स्कूलों में शिक्षकों द्वारा रोजाना एक घंटे की अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। इसके लिए निर्देश भी जारी कर दिए हैं। उपजिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक सोलन, राजकुमार पराशर ने बताया कि अल्फा पद्धति एक ऐसी अभिनव शिक्षण प्रक्रिया है जो बच्चों पर बिना किसी मानसिक बोझ, खेल-खेल और गतिविधियों से भाषा व गणित की बुनियादी दक्षताओं में निपुण बनाती है।
इस वर्ष जिला स्तरीय टास्क फोर्स इस पद्धति को पूरे जिले में चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। कक्षा 1 से 3 तक के सभी विद्यार्थियों में भाषा एवं गणित की बुनियादी दक्षता विकसित करना, जिला एवं खंड स्तर पर शिक्षकों को इस नई पद्धति के लिए तैयार करने के लिए जल्द ही विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों में रटने के बजाय गतिविधि-आधारित और मनोरंजक शिक्षण वातावरण का निर्माण करना। कार्यक्रम की सफलता को जांचने के लिए नियमित मूल्यांकन और फीडबैक सिस्टम लागू रहेगा।
कमजोर बच्चों के लिए विशेष फोकस
यह पहल सोलन के विद्यार्थियों के शैक्षिक भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए एक सक्षम नागरिक के रूप में तैयार होंगे। उप निदेशक ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने स्कूल के शैक्षणिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए प्रतिदिन एक घंटे का अतिरिक्त समय दें। दो महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान के बाद इन स्कूलों में निपुण मेले भी आयोजित किए जाएंगे, जहां बच्चों की दक्षताओं का प्रदर्शन होगा।
कुमारी रीता गुप्ता, शिक्षा उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा