संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन/अर्की/नालागढ़। जिले में पथ परिवहन निगम के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं देने के दावों की हकीकत कुछ और है। हालात यह है कि जो बसें कोरोना काल में बंद की गई थीं, वे अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं। जिले में ऐसे 16 रूट हैं जो कोरोना काल में बंद कर दिए थे।
इनमें चार सोलन जबकि 12 नालागढ़ मंडल के हैं। इन्हें कोरोना की स्थिति ठीक होने के बाद शुरू करने का दावा किया गया था लेकिन अब कम आय का बहाना बनाकर इनमें बसें भेजी ही नहीं गई। इन रूटों पर या तो बसें हैं ही नहीं। यदि चल रही है ंतो उनमें ओवरलोडिंग भी हो रही हैं।
जिले के अर्की, दाड़लाघाट, रामशहर, कुनिहार, देलगी, सलूमणा, देवठी समेत कई ऐसे रूट हैं जहां पर सुबह-शाम ओवरलोडिंग रहती है। सुबह-शाम नौकरीपेशा लोगों और स्कूली बच्चों के लिए एक ही बस रूट पर चलती है। पड़ताल में यह भी पता चला है कि कई इंस्पेक्टर रूटों पर जांच करने ही नहीं पहुंचे हैं। इसके चलते रूटों पर बस चालक और कंडक्टरों की मनमानी चलती है।
ये रूट हुए बंद
नालागढ़ डिपो में ग्रामीण क्षेत्र के एक दर्जन रूट कोरोना के बाद बंद हैं। इसमें कीरतपुर-पल्ली जनोन, नालागढ़-बोथूवा, भरतगढ़ वाया भोगपुर, गुल्लरवाला काली बाड़ी, प्लासी-दभोटा, नालागढ़-जामन की सैर, नालागढ़-परवाणू, चंबा-शिमला, नालागढ़-रोपड़ और ढेला थाना रूट बंद पड़े हैं। इसी तरह सोलन के सोलन-ठूंड, सोलन-लघेचघाट ओर सोलन-मनलोग रूट बंद कर दिए हैं।बस में तकनीकी खराबी आने के बाद सोलन-खनोग रूट पर भी बस सुविधा शुरू नहीं की है। इस बस के लगातार खराब होने की मुख्यमंत्री सेवा संकल्प पर शिकायत कर बस ठीक करने के लिए कहा। इसके बावजूद बस में रूट पर बस भेजना ही बंद कर दिया।
परवाणू के चार लोकल रूट, सभी ओवरलोड
सोलन डिपो के एक दर्जन और परवाणूू डिपो के चार ग्रामीण रूटों पर ओवरलोडिंग हो रही है। इस ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के लिए परिवहन निगम नाकाम साबित हो रहा है। हैरत की बात तो यह है कि कई बसें बस अड्डे से ओवरलोडिंग कर चल रहे हैं। लोगों की जान की परवाह किए बगैर बसों को दौड़ाया जा रहा है। नालागढ़ डिपो मेंअधिकतर बसें रूट पर डीजल का खर्च भी नहीं निकाल पा रही है।
इन रूटों पर अधिक लोड
जिले के तीन बस डिपुओं के लंबे रूट समेत कई लोकल रूट भी हैं। सोलन डिपो के 56 ऐसे रूट हैं जो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुविधा देते हैं। इनमें दर्जन रूटों पर बसें पहले तो सवारियों को ठूंस-ठूंस कर भरते हैं। बाद में तेज गति में बसों को चलाने की शिकायतें आ रही हैं। इनमें सोलन डिपो के तीन रुट शहर में चल रही मुद्रिका बसें, कंडा, कंडाघाट, अर्की-रुगड़ा वाया मांझू समेत सोलन-कंधर, सोलन-बिलासपुर, दाड़लाघाट-शालाघाट, सोलन-खनोग और एक लांग रूट शिमला-दिल्ली रूट भी शामिल हैं। परवाणू डिपो के परवाणू-जंगेशु, परवाणू-बद्दी, परवाणू-कसौली, परवाणू-शिमला रूट पर ओवरलोडिंग का यही हाल है।
क्षेत्रीय प्रबंधक सोलन डिपो शुगल सिंह ने बताया कि खनोग सड़क पर तकनीकी खराबी से बसें नहीं भेजी जा रही हैं। रास्ता भी काफी संकरा है जिससे छोटी बस ही यहां जा सकती है। छोटी बस में तकनीकी खराबी से रूट बंद है। ड्राइवर-कंडक्टरों को ओवरलोडिंग नहीं करने के आदेश हैं।
क्षेत्रीय प्रबंधक परवाणू डिपो जोगिंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि बसों में खराबी की कोई शिकायत नहीं है। इंस्पेक्टर को जांच के आदेश दिए हैं।
नालागढ़ डिपो के आरएम हरपाल सिंह ने बताया कि डिपो में अधिकतर रूटों पर डीजल खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।