धर्मपुर में आयोजित श्री देवी भगवती भागवत कथा के दौरान मौजूद श्रदालु। संवाद
सनातन धर्म मंदिर धर्मपुर में चल रही है श्रीमददेवी भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर सोलन। श्रावण मास के अवसर पर धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्री देवी भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक आचार्य तरुण शर्मा ने कहा कि कथा करने का सौभाग्य भगवान देता है। आजकल भगवान को सुनने वाले भी कम हैं, लेकिन जो भगवान को सुनते हैं वही ही इस संसार को असली रूप से चला रहे हैं। सातवें दिन विश्वनाथ और हरिश्चंद्र की कहानियों का वर्णन किया गया। आचार्य ने बताया कि राजा हरिश्चंद्र हमेशा सत्य बोलते थे और सत्य ही उनकी पहचान थी। हरिश्चंद्र के पुत्र की कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवती पूजा के बाद भी परीक्षा लेती हैं। हरिश्चंद्र का मानना था कि वे नारी शक्ति को नहीं मार सकते, इसके अलावा किसी को भी मार सकते हैं। उन्होंने जीवन में धैर्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कथावाचक ने बताया कि मानव ही नहीं, राक्षस भी अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए देवी की आराधना करते हैं। उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल और निश्चित है और अच्छी मृत्यु पाने के लिए आराधना काम आती है। काली माता ने चंड-मुंड का वध किया, जिसके बाद उनका नाम चामुंडा पड़ा। माता भगवती ने शुंभ और निशुंभ का भी वध किया। आचार्य शर्मा ने कहा कि बच्चों का भाग्य बदला नहीं जा सकता, वे अपना भाग्य स्वयं लेकर आते हैं।