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Solan News: नक्शा पास करवाने में लग रहे लाखों रुपये

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बिजली की बढ़ती दरों से उद्योगों भी किया पलायन
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फोरलेन की धीमी चाल से हो रहे निर्माण से भी उद्यमी परेशान

धक्के खाने के बाद मिल रही फायर एनओसी, समय की हो रही बर्बादी



एजीटी में भी आ रहीं दिक्कतें, कच्चा और तैयार माल पर देना पड़ रहा टैक्स

संवाद न्यूज एजेंसी



सोलन। अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में उद्यमियों ने समस्याओं पर खुलकर चर्चा की। उद्यमियों ने कहा कि अब प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए नक्शा पास करवाना महंगा हो गया है। जहां पहले 10,000 रुपये लगते थे अब 2.50 लाख रुपये नक्शा पास करवाने के लिए लग रहे हैं। इससे काफी दिक्कतें आ रही हैं। पैसा देने के बाद भी आसानी से नक्शा पास नहीं हो पा रहा है। वहीं, सरकार की ओर से लगातार बिजली की दरों को बढ़ाया जा रहा है।
इस कारण उद्योग पलायन कर रहे हैं। उद्यमियों ने कहा कि हिमाचल में उद्योग स्थापित करने का अहम उद्देश्य यह भी था कि यहां सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध हो जाती थी। अब इसके विपरीत हो रहा है। अब बिजली ट्रांसफार्मर लगाने के लिए भी बिजली बोर्ड के चक्कर काटने पड़ते हैं। बिजली के लोड तक से उद्यमी परेशान हो गए हैं। कई बार इस समस्या को सरकार के समक्ष रखा जा चुका है। इस पर चर्चाएं भी हो चुकी हैं, परंतु कोई भी सार्थक निर्णय नहीं लिया गया है।
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पिंजौर से नालागढ़ के बीच बन रहे फोरलेन की धीमी चाल से भी दिक्कतें आ रही हैं। फोरलेन निर्माण में देरी के कारण नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला में उद्योग पलायन कर रहे हैं। सड़कों की हालत काफी खराब हो गई है। बद्दी में प्रबंधक, मालिक और कर्मचारी रोजाना पिंजौर, पंचकूला और चंडीगढ़ व मोहाली से आवाजाही करते हैं। रोजाना 50 किलोमीटर का सफर कर रहे हैं और फिर वापस भी जा रहे हैं। अकसर शिकायत रहती है कि सड़क नहीं है और जाम लगता है। उन्होंने उद्योग मंत्री से आग्रह किया कि सड़क सुविधा को बेहतर किया जाए। 2021 से फोरलेन बन रहा है। दो बार फोरलेन निर्माण कंपनी छोड़कर चली गई है।
निर्माण में देरी और कच्चे तथा तैयार माल की लागत भी बढ़ रही है। इसी तरह फायर एनओसी तक लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बद्दी में फायर एनओसी आसानी से नहीं मिल रही है। कार्यालयों में जाकर फायर एनओसी के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। इसके लिए भी सरकार के साथ कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला है। केंद्र सरकार के साथ इस पर चर्चा की जाए।
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प्रदेश में अतिरिक्त वस्तु कर से भी मुक्ति नहीं मिल रही है। यह टैक्स हिमाचल में ही लग रहा है। 37.50 रुपये प्रति टन के हिसाब से कच्चे और तैयार माल में टैक्स की दरें लग रही हैं। इससे भी काफी दिक्कतें आ रही हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए भी उद्यमियों ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान से आग्रह किया और समस्याओं को जल्द केंद्र सरकार से मिलकर हल निकालने के लिए कहा।
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