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आईटीआई में अब बाबूगिरी नहीं प्रेक्टिकल ट्रेनिंग पर अधिक फोकस

Wed, 31 Aug 2016 10:02 PM IST
ब्यूरो, सोलन
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औद्योगिक क्षेत्रों समेत सभी आईटीआई में पढ़ाई का तरीका जल्द बदलने वाला है। - फोटो : अमर उजाला
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औद्योगिक क्षेत्रों समेत सभी आईटीआई में पढ़ाई का तरीका जल्द बदलने वाला है। कक्षा के बजाय प्रशिक्षुओं को उद्योग में प्रेक्टिकल सीखना अनिवार्य होगा। जर्मनी के वोकेशनल ट्रेड सिस्टम के इस तरह के पैटर्न हो जल्द लागू किया जाएगा। प्रशिक्षु आईटीआई में इस तरह की ट्रेनिंग हासिल करके कौशल को व्यावसायिक रूप से दक्ष होंगे।
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नए तरीके से पढ़ाई करवाने के लिए कंपनियों के साथ एमओयू साइन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कंपनियों को चिन्हित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में सर्वे शुरू हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट के तत्वावधान में यह सिस्टम लागू होगा।
ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग के तहत प्रशिक्षु को 2 साल के किसी भी प्रशिक्षण (ट्रेड) कोर्स में 9 माह का प्रेक्टिकल उद्योगों से प्राप्त करना होगा। एक साल में चार माह उद्योगों में ट्रेनिंग लेनी होगी। इस दौरान किताबी
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पढ़ाई के अलावा जमीनी स्तर पर मशीनों और प्रोडक्शन आदि की जानकारी प्रशिक्षु फील्ड में ले सकेंगे। खास बात यह रहेगी कि आईटीआई से प्रशिक्षुओं को ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र मिलेगा जो नौकरी में सहायक होंगी। कोर्स का एक सर्टिफिकेट तकनीकी शिक्षा बोर्ड और दूसरे उस उद्योग से मिलेगा जहां उसने ट्रेनिंग ली हो। यही नहीं संबंधित कंपनी न्यूनतम मानदेय का 70 फीसदी स्टापंड प्रशिक्षु को ट्रेनिंग के दौरान देगी। ट्रायल के तौर पर यह व्यवस्था जिला सोलन के सोलन और बीबीएन समेत सिरमौर की आईटीआई में की जा रही है।

इस तरह से पूरा होगा कोर्स
प्रशिक्षुओं को 24 महीने की ट्रेनिंग में से 9 महीने अपने ट्रेड से संबंधित चिन्हत औद्योगिक इकाई से प्रेक्टिकल ट्रेनिंग लेनी होगी। इसमें पहले 12 माह संबंधित आईटीआई में पढ़ाई होगी। बाद में नौ माह उद्योगों में प्रेक्टिकल होगा। अंत के तीन माह में फिर से आईटीआई में बिताने होंगे। जहां परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। एक साल के ट्रेड में पांच माह आईटीआई, पांच माह उद्योग और अंत के दो माह आईटीआई में लगाने होंगे। इसके बाद परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।  

सोलन समेत सिरमौर में सर्वे शुरू : शिवेंद्र डोगर
उत्कृष्ट आईटीआई सोलन के प्रिंसिपल शिवेंद्र डोगर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि परवाणू, बद्दी और नालागढ़ में सर्वे किया जा चुका है। ट्रेनिंग के लिए उद्योगों को चिन्हित किया जा रहा है। सिरमौर में यह सर्वे बुधवार को शुरू किया गया। आईटीआई पावंटा साहिब सुशील कुमार गर्ग, लघु उद्योग भारती की प्रदेश इकाई के कोषाध्यक्ष विकास सेठ, परवाणू यूनिट के अध्यक्ष प्रकाश वर्मा, कोषाध्यक्ष ओंकार जसवाल, रविंद्रनाथ मेमोरियल आईटीआई परवाणू के प्रिंसिपल ललित कौशल का इस दौरान सहयोग लिया जा रहा है।
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