भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से बनाए जाने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस का डाटा लीक हो गया है। ऐसे में शातिर दुकानदारों, होटल, ढाबा व रेस्तरां संचालकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
शातिर कारोबारियों को फोन कर लाइसेंस रिन्यू करने के नाम पर जाल में फंसा रहे हैं और हजारों रुपये की ठग रहे हैं। दुकानदारों की शिकायत पर खाद्य सुरक्षा विभाग एडवाइजरी जारी कर पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी है। शातिर खाद्य लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले कारोबारियों को इसे रिन्यू करवाने के बारे में कह रहे हैं।
हैरत की बात तो ये है कि 500 रुपये में पांच साल के लिए बनने वाले लाइसेंस के लिए शातिर 2,000 से 5,000 रुपये की मांग कर रहे हैं। अगर कोई इनके जाल में फंस जाता है तो वे इसके बाद 500-500 रुपये कर पैसे एंठते रहते हैं। शातिरों की ओर से बार-बार किए जाने वाले फोन कॉल से मालिक परेशान हो गए हैं।
उधर, खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि एफएसएसएआई और विभाग की ओर से कोई फोन कॉल लाइसेंस रिन्यू करने के लिए नहीं किए जाते हैं। पोर्टल पर लॉगइन करने के बाद फीस जमा करवाने पर आसानी से लाइसेंस स्वयं जनरेट हो जाता है। बताया जा रहा है कि रोजाना सैकड़ों मालिकों को फ्रॉड कॉल कर शातिर जाल में फंसा रहे हैं। विभाग ने इनसे सतर्क रहने की सलाह दी है।
दो हजार रुपये मांगने पर हुआ शक
धर्मपुर में डेली नीड्स की दुकान चलाने वाले राजू ने बताया कि शुक्रवार को उनके खाद्य लाइसेंस की अवधि समाप्त हो रही थी। सुबह करीब 11:00 बजे एक फोन आया कि लाइसेंस की अवधि समाप्त होने वाली है और उसे रिन्यू करें। पहले तो कॉल में सच्चाई लगी, लेकिन बाद जब लाइसेंस बनाने के लिए 2,000 रुपये की मांग की तो शक हुआ। शातिरों ने ये तक कहा कि पहले उनके लाइसेंस की अवधि पांच साल की थी। अब 2000 रुपये में लाइसेंस बनेगा। इसमें अपडेट होने के साथ-साथ कागजों के अपलोड चार्जेज भी शामिल हैं। इसके बाद 500 रुपये के हिसाब से हर साल लाइसेंस बनाया जाएगा।
पुरानी दर पर बन गया लाइसेंस
सोलन के ढाबा मालिक संजीव ने बताया कि उनका खाद्य लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले फ्रॉड कॉल आ रहे हैं। शातिरों ने उन्हें भी लाइसेंस रिन्यू करने के लिए फोन किया। लाइसेंस रिन्यू के संबंध में 5,000 रुपये की मांग की। पहले तो हैरानी हुई की एफएसएसएआई ने लाइसेंस बनाने के अचानक बढ़ा दिए, लेकिन बाद में लोकमित्र केंद्र में जाकर जांच की तो पुरानी दरों पर ही लाइसेंस बन गया।
लाइसेंस बनाने की प्रणाली ऑनलाइन है। फॉसकॉस की साइट पर आसानी से लाइसेंस बनता है। विभाग और एफएसएसएआई की ओर से किसी दुकानदार या प्रतिष्ठान के मालिक को लाइसेंस रिन्यू करने के लिए फोन नहीं किया जाता, न ही लाइसेंस रिन्यू होने की जानकारी विभाग के कार्यालय में होती है। ये ऑटोमेटिक सिस्टम है, जहां पर प्रतिष्ठान का मालिक स्वयं लाइसेंस फीस जमा करवाकर रिन्यू कर सकता है। ऐसे फोन कॉल आए तो ध्यान न दें। -डॉ. अतुल कायस्थ, सहायक आयुक्त, जिला खाद्य सुरक्षा विभाग सोलन