सोलन। ...आखिर हमारी क्या गलती। क्यों हम पर ध्यान नहीं दे रही सरकार। क्या महामारी में ही आया हमारा ध्यान। ये प्रश्न कोरोना काल में पिछले छह महीने से मेकशिफ्ट अस्पताल सोलन में सेवाएं दे रहे 165 कर्मचारियों ने अस्पताल के बंद होने के बाद सरकार और प्रशासन से किए।
कर्मचारियों ने कहा कि महामारी के समय मेक शिफ्ट अस्पताल में दिन-रात सेवाएं दीं लेकिन जब इस अस्पताल को बंद कर दिया तो किसी ने कर्मचारियों की ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद आउटसोर्स पर रखे कुछ कर्मचारी वापस लौट गए हैं तो कुछ कर्मी आस लगाकर अस्पताल में बैठे हैं। कंपनी की ओर से भी कर्मियों को कुछ नहीं बताया जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान दिन-रात मरीजों की सेवा में लगा दिया। इस दौरान सभी मिलकर सेवाभाव से कार्य करते रहे। इनमें से कई कर्मचारी निजी संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे थे। ठेकेदार ने इन्हें कई प्रलोभन दिए और सरकार की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव के बारे में भी बताया।
यही नहीं आउटसोर्स पर रखने वाले ठेकेदार ने भी पीएफ, इंसेंटिव सहित अन्य सुविधाएं देने की बात कही थी। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों के इंसेंटिव के लिए सरकार को लिखा है, लेकिन इसकी अभी अप्रूवल नहीं आई है। सरकार से इंसेंटिव देने के आदेश आएंगे तो उन्हें दे दिया जाएगा।
अभी तक नहीं मिला इंसेंटिव : उमेश
वार्ड ब्वाय उमेश ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे इंसेंटिव की आस लगाकर बैठे हैं। अब हमसे कोई बात करने के लिए तैयार नहीं है। सीएमओ सोलन से भी बातचीत की है लेकिन वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे रहे हैं।
कैसे जाएं घर : रजत
रजत ने बताया कि वे एक नौकर छोड़ कोविड के बीच मेकशिफ्ट अस्पताल में कार्य के लिए आए थे। इससे उनके परिवार वाले भी काफी खुश थे लेकिन अब अस्पताल में ताला लगने के बाद घर वालों को इस बारे में कैसे बताएं। इसलिए वह दूसरी नौकरी की तलाश में है जिसके बाद ही घर जाने का फैसला लेंगे।
जरूरत पड़ी तो बुला लिया हमें : खेमराज
खेमराज ने बताया कि कोविड काल में उन्होंने पूरा-पूरा दिन पीपीई किट पहनकर मरीजों की सेवा की। अब अचानक इस मेकशिफ्ट अस्पताल को बंद कर दिया गया है। इस कारण वह सड़क पर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसी प्रकार होगा तो क्या आगामी दिनों में कोई आपात समय में नौकरी कैसे करेगा।