हालांकि, अब पीड़िता दोबारा से अपील कर सकती है। इससे पहले मामले में 31 दिसंबर 2025 को बहस हुई थी। दोनों पक्षों के वकीलों ने इसमें अपनी-अपनी बहस की। वहीं न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पर वीरवार को न्यायालय ने फैसला पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के पक्ष में दे दिया।
कसौली पुलिस ने दो माह से अधिक समय तक इस केस की जांच की थी लेकिन सबूत नहीं मिले। पीड़िता ने अपना मेडिकल करवाने से भी इनकार कर दिया था। पुराना मामला होने के कारण पुलिस को केस में न तो सीसीटीवी फुटेज मिल पाई और न ही कोई ठोस सबूत। कसौली कोर्ट इस केस में पहले भी 12 मार्च 2025 को पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर चुकी है, लेकिन तब पीड़िता ने सोलन की जिला अदालत में रिवीजन पिटीशन डालकर चुनौती दी थी। जिला अदालत के आदेशों पर कसौली कोर्ट ने दोबारा क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई की।