पांव पसार रहे पीलिया को लेकर सरकार और प्रशासन के कड़े आदेशों की जमीनी हकीकत अफसरशाही की पोल खोलने वाली है। विभागों और नगर निकाय में आपसी तालमेल की कमी के चलते लोगों की सेहत खतरे में है।
सोलन शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली पानी की सप्लाई की व्यवस्था इसका जीता जागता उदाहरण है। सरकारी आदेशों के बाद बेशक आईपीएच ने अश्वनी खड्ड के गंदे पानी की सप्लाई बंद कर दी है। वहीं गिरि के पानी की सुपर क्लोरीनेशन हो रही है। इस सब के बावजूद सोलन शहर की हजारों की आबादी तक पहुंचने वाला पानी खुले टैंकों में फिर से दूषित हो रहा है। टैंकों की हालत अभी भी चिंताजनक बनी है।
कचरा, प्लास्टिक की बोतलें और मुख्य टैंक के छत के नीचे वाली जालियों में बड़े छेद मानो व्यवस्था की बदहाली बयां कर रहे हैं। रविवार अवकाश के दिन दोपहर 12:25 बजे प्रशासन के आदेशों पर व्यवस्था के सुधार की ग्राउंड रियलिटी अमर उजाला की टीम ने जानने की कोशिश की। दोपहर 12:40 बजे तक अव्यवस्था का आलम दिखा। अचानक 12:45 पर आईपीएच, नप के अभियंता, पार्षदों व कांग्रेस के नेताओं की टोली भी सरकारी गाड़ी में वहां पहुंची। जहां उचित निर्देश देकर व व्यवस्था जांच कर खामियों को नोट किया गया।