बाहा स्कूल भवन असुरक्षित होने के बाद बच्चों के लिए घिनरी के रामस्वरूप बने मिसाल
स्कूल में 175 बच्चे कर रहे शिक्षा ग्रहण
एच आर धीमान
नालागढ़। जहां आज के दौर में बिना स्वार्थ के कोई एक कमरा न दे, वहीं नालागढ़ के घिनरी निवासी रामस्वरूप शिक्षा के मंदिर को बचाने के लिए मिसाल बन गए हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बाहा का भवन असुरक्षित होने के बाद, रामस्वरूप ने पिछले दो साल से अपना 12 कमरों का निजी भवन स्कूली बच्चों के लिए समर्पित कर रखा है। हैरानी की बात यह है कि सरकार की ओर से अभी तक उन्हें एक पैसा किराया नहीं मिला है, फिर भी उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई में बाधा नहीं आने दी। दो साल पहले भारी बारिश और आपदा के कारण बाहा स्कूल के भवन में दरारें आ गई थीं, जिसके बाद विभाग ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया था। 175 बच्चों और शिक्षकों के सामने संकट खड़ा हो गया कि पढ़ाई कहां होगी? ऐसे में रामस्वरूप आगे आए और कून प्लेट गांव स्थित अपना विशाल भवन खाली कर स्कूल को सौंप दिया। आज इसी भवन से दो बैच पास आउट होकर उच्च संस्थानों में जा चुके हैं। संवाद
किराया नहीं मिला, फिर भी बिजली-पानी की मुफ्त सुविधा
स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान सुरजीत सिंह ने बताया कि रामस्वरूप ने किराये के लिए कभी दबाव नहीं बनाया। भवन के साथ-साथ बच्चों को बिजली, पानी और खेल के मैदान की सुविधा भी मिल रही है। हाल ही में वार्षिक समारोह भी इसी मैदान में हुआ, जो पुराने स्कूल भवन से भी बेहतर साबित हुआ। हालांकि, रजवान और रंडाला गांव के बच्चों को थोड़ी दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन बच्चों का भविष्य सुरक्षित है। पहले यह स्कूल स्वारघाट-रामशहर मार्ग पर था, जो अब स्वारघाट-बिलासपुर हाईवे पर शिफ्ट हो गया है। शिक्षा विभाग अब स्कूल के लिए स्थायी समाधान खोजने में जुटा है।
कोट
निजी भवन के मालिक को नियमानुसार किराया दिया जाएगा, जिसकी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। स्कूल के नए भवन के लिए जमीन देखी जा रही है। जल्द ही जमीन फाइनल कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।-
-गोपाल चौहान, उपनिदेशक, शिक्षा विभाग।