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Solan News: 78 साल बाद भी गांनणा गांव प्यासा

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विकास चंदेल, गांव गांनणा, ग्राम पंचायत क्यारड़।
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गांव के लिए आज तक नहीं बनी पेयजल योजना
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सुबह 4 बजे से लगती है लाइन, पानी की किल्लत से टूट रहे बच्चों के रिश्ते
बच्चों की पढ़ाई के साथ रोजगार पर मार, बिना नहाए स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल,
योगेश शर्मा
अर्की (सोलन)। अर्की उपमंडल के गांनणा गांव में आज भी लोगों की सुबह पानी की तलाश से शुरू होती है और इसी चिंता के साथ दिन खत्म होता है। देश को आजाद हुए 78 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सोलन और बिलासपुर जिले की सीमा पर बसे इस गांव में आज तक जल शक्ति विभाग की किसी भी पेयजल योजना का लाभ नहीं पहुंच पाया है।
ग्राम पंचायत क्यारड़ के इस गांव में करीब 20 से अधिक परिवार रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि डिजिटल युग में भी गांव के किसी घर या सार्वजनिक स्थान पर विभाग का एक भी नल नहीं लगा है। ग्रामीणों को अपनी जरूरत का पानी प्राकृतिक स्रोतों से जुटाना पड़ रहा है।
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गांव के निवासी कमल सिंह का कहना है कि लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन गांव के लोगों को आज भी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इस ओर ध्यान दिया और न ही चुनाव जीतने के बाद किसी जनप्रतिनिधि ने समस्या का स्थायी समाधान करवाने का प्रयास किया।
गांव में पानी की कमी का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ग्रामीणों को कई बार दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। पानी जुटाने की यह मजबूरी अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है।
प्राकृतिक स्रोत पर निर्भरता
55 वर्षीय विमला देवी और कृष्णा देवी ने बताया कि लोग सुबह 4:00 बजे उठकर बर्तनों के साथ एक प्राकृतिक स्रोत पर लाइन लगा लेते हैं। पानी कम होने के कारण एक-एक गैलन भरने में घंटों लग जाते हैं, जिससे अक्सर आपस में लड़ाई-झगड़े भी हो जाते हैं।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
कृष्णा देवी ने बताया कि जब प्राकृतिक स्रोत सूख जाता है, तो कई किलोमीटर दूर नाले से पानी लाना पड़ता है। स्थिति इतनी बदतर है कि पानी की कमी के चलते स्कूल जाने वाले बच्चे कई दिनों तक बिना नहाए ही स्कूल जाने को मजबूर हैं।
नहीं आ रहे बेटों के रिश्ते
70 वर्षीय बुजुर्ग परस राम ने रूआंसे मन से कहा कि उनके बुजुर्गों से लेकर आज तक इस गांव ने सिर्फ पानी का संकट ही देखा है। गांव में पानी की इस भयंकर किल्लत के चलते अब उनके गांव के लड़कों के रिश्ते तक होने बंद हो गए हैं। कोई अपनी बेटी इस गांव में ब्याहना नहीं चाहता।
रोजगार पर भी मार, टैंक सफेद हाथी साबित
युवक विकास चंदेल का कहना है कि अगर गांव में पानी की कोई योजना होती, तो युवा नकदी फसलों (सब्जियों) की खेती कर आत्मनिर्भर बन सकते थे। पानी न होने से युवाओं के पास रोजगार के अवसर भी खत्म हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले अली खड्ड स्कीम के तहत एक पेयजल टैंक बनाया गया था। उसमें आज तक पानी की एक बूंद नहीं डाली गई। रखरखाव के अभाव में अब वह टैंक भी फटने के कगार पर है।
अली भूर्जणी योजना के तहत गांनणा गांव के पास पानी का टैंक बनाया है। विभाग जल्द ही इस स्कीम की टेस्टिंग करने जा रहा है। टेस्टिंग सफल होते ही ग्रामीणों के घरों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने का काम शुरू कर दिया जाएगा, जिससे लोगों को जल्द ही इस समस्या से राहत मिलेगी।
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चेतराम चौधरी, सहायक अभियंता, जल शक्ति विभाग

विकास चंदेल, गांव गांनणा, ग्राम पंचायत क्यारड़।

विकास चंदेल, गांव गांनणा, ग्राम पंचायत क्यारड़।

विकास चंदेल, गांव गांनणा, ग्राम पंचायत क्यारड़।

विकास चंदेल, गांव गांनणा, ग्राम पंचायत क्यारड़।

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