खेतों से पानी की उचित निकासी की भी रखें व्यवस्था
बारिश के बाद टमाटर में रहता है काला धब्बा रोग का डर
कृषि विभाग ने भी किसानों के लिए दिशा-निर्देश किए जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बारिश के बाद टमाटर-शिमला मिर्च समेत अन्य सब्जियों में रोग लगना भी शुरू हो जाते हैं। इनसे फसलों को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को एडवाइजरी जारी की है। जिला में इन दिनों टमाटर का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में किसानों को टमाटर के पौधों को सुरक्षित रखने के लिए खास कदम उठाने जरूरी हैं।
जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष मानसून की बारिश के बाद जिला में टमाटर की फसल काला धब्बा रोग (बकाई रॉट) की चपेट में आ गई थी। जिससे किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इस दौरान किसानों ने अपने स्तर पर बीमारी को नियंत्रण में करने के लिए दवाओं का स्प्रे तो किया लेकिन रोग को रोक नहीं पाए। काले धब्बे से सड़कर खेतों के किनारे टमाटर के ढेर लग गए थे। अधिक बारिश की वजह से टमाटर के पत्तों में सड़न रोग लग जाता है। इससे पत्ते हटाने जरूरी हो जाते हैं। यदि इन पत्तों की कटाई-छंटाई समय रहते न की गई तो पौधा सूख सकता है। इसलिए किसानों को सूख चुके पत्तों को हटा देना चाहिए। छिड़काव भी बारिश के बाद ही करना चाहिए। इसके अलावा खेतों में पानी के निकास का उचित प्रबंध करें। पानी को खड़ा न रहने दें। खेतों से खरपतवार की निराई और गुड़ाई करने की भी राय विभाग ने किसानों को दी है।
उधर, जिला कृषि अधिकारी सीमा कंसल ने बताया कि बारिश के बाद अधिक नमी से टमाटर, शिमला मिर्च में सड़न रोग लग जाता है। इससे निपटने के लिए खेतों में साफ सफाई का विशेष ध्यान देना चाहिए। किसानों को खेतों से पानी की उचित व्यवस्था के साथ खरपतवार को समय-समय पर निकालना चाहिए और पौधों को जमीन से सीधा खड़ा रखे।