नौ लाख के बजट में उलझीं तीन इलेक्ट्रिक वैन, कथेड़ वर्कशॉप में फांक रहीं धूल, मरीज और बुजुर्ग परेशान
शहर में 10 रुपये में क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचाने वाली वैन 6 महीने से बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम सोलन डिपो की ओर से शहर में चलाई जाने वाली इलेक्ट्रिक टैक्सियां अब वर्कशॉप में धूल फांक रही हैं। तीन ई-वैन की बैटरियां खराब होने के बाद इन्हें ठीक कराने का खर्च करीब 9 लाख रुपये आ रहा है, लेकिन बजट के अभाव में निगम नई बैटरियां नहीं खरीद पा रहा है। बजट न मिलने के कारण ये टैक्सियां केवल शोपीस बनकर रह गई हैं और पिछले 5-6 महीनों से इनका संचालन पूरी तरह ठप पड़ा है।
जानकारी के अनुसार डिपो की दो इलेक्ट्रिक टैक्सियां पहले खराब हुई थीं। इसके बाद तीसरी टैक्सी को रूट पर उतारा गया, लेकिन कुछ ही समय में उसकी बैटरी ने भी जवाब दे दिया। इसके बाद उसे भी वर्कशॉप में खड़ा कर दिया गया। ये टैक्सियां शहर के चंबाघाट से क्षेत्रीय अस्पताल सोलन और कथेड़ बाईपास तक चलाई जाती थीं। मात्र 10 रुपये के मामूली किराये में लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने की सुलभ सुविधा मिलती थी। टैक्सियों के बंद होने से अब तीमारदारों, बुजुर्गों और मरीजों को मजबूरी में बसों और ऑटो के हिचकोले खाते सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से इन्हें दुरुस्त कर दोबारा चलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन एचआरटीसी प्रबंधन की ओर से बजट की फाइल अधर में लटकी हुई है।
कोट
निगम की ओर से इलेइलेक्ट्रिक टैक्सियों को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन मरम्मत का खर्च काफी अधिक है। अभी तक डिपो को आवश्यक बजट नहीं मिल पाया है। जैसे ही बजट जारी होता है, इन्हें जल्द ठीक करवाकर दोबारा रूटों पर बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
-तरसेम सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक एचआरटी सोलन डिपो