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ईएलआई अस्पताल परवाणू में डॉक्टरों के आठ पद रिक्त

Fri, 02 Dec 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो, परवाणू, सोलन
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परवाणू अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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ईएसआई के दायरे में आने वाली करीब 40 हजार की आबादी को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले परवाणू अस्पताल में हाल बेहाल हैं। रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड सेवा ठप है। मशीनें बेकार धूल फांक रही हैं। आलम यह है कि अल्ट्रासाउंड के लिए रोगियों को कालका के निजी अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है। मजबूरन रोगियों को दो तीन गुणा अधिक खर्च करके निजी चिकित्सालयों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है। ऐसे में रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के आठ पद रिक्त हैं।
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एनएच-22 शिमला-कालका मार्ग पर प्रदेश का मुख्यद्वार परवाणू सड़क हादसों के लिए अति संवेदनशील श्रेणी में है। ऐसे में ईएसआई अस्पताल में अहमियत काफी है। यहां इमरजेंसी के लिए सुविधाएं भी नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड के अलावा यहां रक्त बैंक अभी तक शुरू नहीं हो सका है। लाखों रुपये की मशीनें पड़ी धूल फांक रही है। इसके अलावा डिस्पेंसरी में रोगियों को दवाएं लेना किसी मुसीबत से कम नहीं। एक छोटी खिड़की होने के कारण सस्ती दवा की आस में आए रोगियों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। स्थानीय लोगों में परवेश, मनोज, दीपक, प्रदीप, अविनाश और प्रहलाद ने ईएसआई परवाणू में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की मांग की है।

14 में से रह गए आठ डॉक्टर
लोगों का कहना है कि सरकार ने सरप्लस कहकर 14 में से छह डॉक्टरों को अन्य जगह स्थानांतरण तो कर दिया है। लेकिन इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। रात की ड्यूटी के अलावा कोर्ट और कैंप आदि कार्यों के बाद दिन के समय ओपीडी एक या दो चिकित्सकों के हवाले होती है। ईएनटी और एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट न होने से भी लोग दिक्कत में है।
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चिकित्सकों की सिक्योरिटी की कमी
रात को चिकित्सक परवाणू अस्पताल में ड्यूटी देने से भी कतराते हैं। इसका कारण भी वाजिब है। यहां ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों से झगड़े और मारपीट के कई मामले सामने आ चुके हैं। लिहाजा रात के समय अस्पताल में सिक्योरिटी न होने से रोगियों की सुरक्षा पर भी सवाल है।

समय-समय पर भेजे जा रहे प्रस्ताव
कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कपिल शर्मा ने बताया कि ईएसआई के नियमों के तहत चिकित्सक पूरे हैं। लेकिन भारी ओपीडी को देखते हुए चिकित्सकों की कमी महसूस हो रही है। एनेस्थीसिया के लिए विशेषज्ञ आउटसोर्स किया है। ईएनटी का विशेषज्ञ नहीं है। शेष मांगों को लेकर समय-समय पर आला अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जाता है।
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