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पानी की खरीद विकास कार्यों पर भारी

Mon, 14 Dec 2015 10:49 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोलन
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सोलन। आईपीएच से महंगे पानी की खरीद शहर के विकास पर भारी पड़ने लगी है। डेवलपमेंट पर खर्च किए जाने वाली भारी भरकम रकम नगर परिषद को पानी के बिल के रूप में आइपीएच को देनी पड़ रही है।
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आईपीएच से महंगे पानी की खरीद करके लोगों को सस्ते में देना नगर परिषद के लिए गले की फांस बन चुका है। औसतन प्रतिमाह 40 से 45 लाख रुपये तक का कर्ज बढ़ रहा है। नतीजतन मौजूदा समय में भी नगर परिषद सोलन ने आईपीएच विभाग को करीब 25 करोड़ रुपये पानी बिल की एवज में देने हैं। लिहाजा अब वित्तीय स्थिति बिगड़ती देख नगर परिषद ने प्रदेश सरकार से 25 करोड़ का कर्ज माफ करने की गुहार लगाई है। साथ ही इतनी रकम आईपीएच के खाते में देने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं।

यहां फंसा है पेंच
सोलन में पानी के वितरण का जिम्मा नगर परिषद के हवाले है। आईपीएच करीब 18 रुपये के हिसाब से प्रति हजार लीटर पानी नगर परिषद को दे रहा है। वहीं नगर परिषद को यही पानी आगे उपभोक्ताओं को करीब 12 रुपये के करीब देना पड़ रहा है। 06 रुपये का नुकसान नगर परिषद को देना पड़ रहा है।
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हर साल बढ़ जाता है कर्ज
एक अनुमान के मुताबिक हर साल नगर परिषद आईपीएच को 01 करोड़ की अदायगी करता है। इसके बावजूद लाखों का कर्ज हर साल बढ़ रहा है। वसूली के लिए आईपीएच बार-बार नोटिस भी जारी करता है, लेकिन पानी का भुगतान क्षमता से अधिक करने की हालत में नगर परिषद नहीं है।

ये होते हैं विकास के कार्य
सड़कों की मरम्मत, पार्कों का जीर्णोद्धार, सफाई व्यवस्था, नए रास्तों का निर्माण, पेयजल संबंधी समस्याएं जैसे पानी की लीकेज, पाइपें बदलना के अलावा स्ट्रीट लाइट, ओवर ब्रिजों का निर्माण, पार्किंग आदि शामिल हैं।

समस्याएं हैं शहर में बरकरार
सोलन शहर के 13 वार्डों में करीब 85000 की आबादी है। हालांकि परिषद का दावा है कि शहर में सभी प्रकार की सुविधाएं लोगों को दी जा रही हैं। बावजूद इसके, अधिकांश लोग समस्याओं को लेकर नगर परिषद से नाराज दिखते हैं। इसके अतिरिक्त शहर में घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ताओं को एक ही दर पर पानी मुहैया करवाया जा रहा है।

दरें कम होने पर मिलेगी राहत : पंत
नगर परिषद के अध्यक्ष कुल राकेश पंत का कहना है कि पानी का जिम्मा एक ही एजेंसी सुपुर्द होना चाहिए। कीमतों का निर्धारण पुन: होना चाहिए। कर्जा माफ करने के लिए प्रदेश सरकार को लिखा गया है। आईपीएच विभाग महंगी दरों पर पानी मुहैया करवा रहा है। इससे परिषद की अधिकांश कमाई बिल में ही जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि पानी की दरें कम की जाएं तो परिषद को कुछ राहत मिल सकेगी।
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