हर दो वर्ष में 10 प्रतिशत शुल्क बढ़ने से के ऑपरेटर नाराज, सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। दाड़लाघाट के ट्रक ऑपरेटरों ने प्रदेश सरकार द्वारा वाहन हिमाचल परमिट शुल्क में की गई बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया है। ऑपरेटर हर दो वर्ष बाद 10 फीसदी शुल्क वृद्धि के प्रावधान को लेकर भी चिंतित हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि यह फैसला परिवहन व्यवसाय और हजारों परिवारों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
अदाणी समूह की अंबुजा सीमेंट उद्योग से जुड़े इन ऑपरेटरों ने संयुक्त रूप से अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया कि बढ़ती परिचालन लागत, डीजल की कीमतें और वाहन रखरखाव पहले से ही एक चुनौती है। ऐसे में परमिट शुल्क में वृद्धि से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। ऑपरेटरों ने कहा कि वर्ष 1995 के बाद शुल्क में संशोधन किया गया है, लेकिन हर दो वर्ष बाद स्वतः 10 फीसदी शुल्क बढ़ाने का प्रावधान चिंताजनक है। परिवहन व्यवसाय पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह निर्णय उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा करेगा। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। ऑपरेटरों ने परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ चर्चा कर उचित समाधान निकालने की अपील की।
ट्रक ऑपरेटरों ने कहा कि किसी भी नीति या शुल्क वृद्धि से पहले हितधारकों से संवाद आवश्यक है। इससे सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सकता है। जयदेव कौंडल, राम कृष्ण बंसल, नरेश गुप्ता और वेद प्रकाश शुक्ला सहित कई ऑपरेटरों ने अपनी बात रखी। उन्होंने इस फैसले को एकतरफा बताया। उनका मानना है कि यह निर्णय बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के लिया गया है।
ऑपरेटरों ने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। इसमें विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें।