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Solan News: छठ महापर्व कल से, पूर्वांचल के लोगों में भारी उत्साह

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तैयारियां जोरों पर, घाट की सफाई का कार्य शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। छठ पर्व बीबीएन में शनिवार से शुरू हो जाएगा। बीबीएन में करीब दो लाख प्रवासी लोग इस पर्व को मनाते हैं। पूर्वांचल जन कल्याण समिति से जुड़े पर्व को देखते हुए घाट पर साफ सफाई का कार्यक्रम तीव्र गति से चल रहा है। छठ का पहला दिन नहाय खाय से प्रारंभ होता है। नहाय-खाय 25 अक्तूबर को है। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:41 बजे और सूर्यास्त शाम को 5:31 बजे होगा। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करेंगी। वहीं दूसरे दिन खरना व्रत रखा जाएगा।
दूसरे दिन खरना व्रत कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 26 अक्तूबर को होगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:42 बजे और सूर्यास्त शाम को 05:30 बजे होगा। तीसरा दिन छठ पूजा के पर्व का महत्वपूर्ण दिन होता है। यह मुख्य दिन कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 27 अक्तूबर दिन सोमवार को है। इस दिन ही छठ पूजा होगी। इस दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और चौथे दिन 28 अक्तूबर को छठ पर्व का समापन होगा। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाएगा। छठ पूजा का सूर्योदय अर्घ्य तथा पारण 28 अक्तूबर को ही उगते सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होगा। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह अर्घ्य व्रती महिलाएं जलाशय या तालाब में कमर तक पानी में जाकर देती हैं और सूर्य का स्मरण करती हैं।
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बुधवार को पूर्वांचल छठ पूजा वेल्फेयर सोसायटी की ओर से घाट की सफाई का कार्य किया गया। कमेटी के सदस्यों बृज लाल शर्मा, प्रकाश ओझा, संजीव, चंदन, आलोक चौबे, अनिल सिंह, राम जन्म यादव, पवन सिंह, गुड्डू शर्मा, अरुण बाबा, दीपक यादव ने सफाई का कार्य किया।
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ऐसे मनाते हैं त्योहार
पूर्वांचल छठ पूजा वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष रामजी तिवारी ने बताया कि इस त्योहार की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती है। सभी के लिए नए कपड़े, विभिन्न प्रकार के फलों की खरीदारी, घर में मीठी पूड़ी जिसे स्थानीय भाषा में ठेकुआ भी कहते हैं, प्रमुख रूप से बनाया जाता है। ठेकुआ को गेहूं के आटे के साथ चीनी या गुड़ का प्रयोग करके बनाते हैं। इस पर्व में सब कुछ नया होता है। इस पूजन में सूप का बहुत ही महत्व है। छठ में किसी भी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती। छठ में सूर्य देवता और छठी मैया का आह्वान किया जाता है। इस पूजा में खड्ड या तालाब के किनारे मिट्टी की वेदी बनाकर इस पर ही पूजन की शुरुआत होती है। बद्दी के सनसिटी मार्ग पर छठ घाट पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होगा।
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