सोलन। कसौली तहसील के तहत खरीदा प्लाट राजस्व महकमे के कागजों से गायब हो गया। शिमला के दंपति ने इस जमीन को वर्ष 2003 में खरीदा था। दंपति का आरोप है कि पटवारी ने मिलीभगत से वर्ष 2015 में उनकी जमीन किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर करवा दी। 12 सालों तक इस जमीन पर उनका मालिकाना हक था। लेकिन अब जमीन राजस्व रिकार्ड में उनके नाम नहीं है। पीड़ित पक्ष ने अब जमीन की धोखाधड़ी का यह मामला विजिलेंस विभाग के पास दर्ज करवाया है। जमीन की कीमत लाखों में है।
दंपति ने पटवारी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाकर जमीन के साथ ही पटवारी की आय की जांच की मांग भी की है। पीड़ित दंपति बालकृष्ण भारद्वाज और सीता भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2003 में 11 विस्वा जमीन नंदलाल और प्रेम लाल से खरीदी थी। इसका सौदा तीन अक्टूबर 2003 को हुआ। पांच विस्वा जमीन सीमा भारद्वाज के नाम पर मोहन लाल पुत्र कल्याण सिंह से खरीदी थी। इसका पंजीकरण 28 मार्च 2011 को हुआ था। लेकिन इस जमीन को पटवारी ने मिलीभगत के साथ किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर दिया। यह ट्रांसफर 30 जुलाई 2015 को हुई है। इसमें 11 विस्वा जमीन से मालिक का नाम काट दिया है। पीड़ित दंपति के अनुसार जब उन्होंने इस मामले के संबंध में आवाज उठाई तो उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने मामले को विजिलेंस के पास दर्ज करवाया। बालकृष्ण भारद्वाज ने बताया कि जानबूझ कर उनका नाम जमीन से काटा है। जमीन के कागज और वर्ष 2003 से लेकर 2015 तक के राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन उनके नाम पर ही रही। लेकिन इसके बाद उनका नाम राजस्व रिकार्ड से गायब कर दिया है। अब पीड़ित दंपति ने विजिलेंस विभाग से जांच करवाने की मांग की है।
पटवारी पर पहले भी लगे हैं आरोप : डीएसपी
विजिलेंस विभाग की डीएसपी श्वेता ठाकुर ने कहा कि जिस पटवारी पर आरोप लगे हैं उस पर पहले भी कई मामलों में जांच चल रही है। दंपति की शिकायत पर विभाग आवश्यक कार्रवाई करेगा। बताया कि दंपति से केस के बारे में पूरी छानबीन की जाएगी और दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ विभाग सख्त कदम उठाएगा।
मुख्य सचिव को सुनाएंगे दुखड़ा : भारद्वाज
पीड़ित बालकृष्ण ने बताया कि उनकी जमीन गायब हो गई है। वर्ष 2003 में इस जमीन की बाकायदा उनके नाम रजिस्ट्री हुई थी। इसके उनके पास प्रमाण हैं। इस मुद्दे पर वे जल्द ही मुख्य सचिव से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाएंगे। उन्होंने बताया कि पटवारी की मिलीभगत से यह कारनामा हुआ है।