नालागढ़ (सोलन)। प्रदेश भर के 108 एंबुलेंस कर्मी की हड़ताल के कारण नालागढ़ के सिविल अस्पताल में दाखिल भाटिया पंचायत के पूर्व प्रधान को अपनी जान गंवानी पड़ी। पूर्व प्रधान नराता राम आठ अगस्त को सुबह बीमार हो गए और उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल नालागढ़ में भर्ती करवाया गया। यहां पर डॉक्टर उन्हें उपचार दे रहे थे लेकिन शाम को उनकी हालत बिगड़ गई और डॉक्टर ने उसे पीजीआई रेफर कर दिया।
राष्ट्रीय एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल के चलते होमगार्ड चालक को गाड़ी की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिस एंबुलेंस में पूर्व प्रधान को ले जाया जा रहा था, वह पहले खराब हो गई। इसके बाद एंबुलेंस में रखी ऑक्सीजन भी खत्म हो गई। इसके चलते बीच रास्ते में ही पूर्व प्रधान ने दम तोड़ दिया। पूर्व प्रधान को सही स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने के कारण उनके परिजनों अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मृतक के परिजनों वापस मृतक के शव को नालागढ़ अस्पताल लाने के बाद यहां जमकर हंगामा किया। सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर मामले में दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। मृतक के परिजन के रिश्तेदार सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जिस गाड़ी में वह पीजीआई जा रहे थे, उस गाड़ी की हालत खराब थी और उसमें कोई स्टाफ की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस में एक चालक ही था जिस कारण उनके मरीज की रास्ते में मौत हो गई। उन्होंने सरकार से मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
मौत के कारणों की जांच जारी : बीएमओ
बीएमओ डॉ. केडी जस्सल का कहना है कि आपात स्थिति में मरीज को पीजीआई रेफर किया गया था। हड़ताल की वजह से गृहरक्षक की मदद से एंबुलेंस में मरीज को भेजा गया लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। मौत के कारणों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि परिजनों ने एंबुलेंस में ईएमटी न होने की शिकायत की है, जांच की जा रही है।