स्टाफ व लाइसेंस न होने से चालू नहीं हो पाई यूनिट, मरीज परेशान
प्लेटलेट्स-प्लाज्मा के लिए पीजीआई की लग रही दौड़
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ अस्पताल में स्थापित ब्लड बैंक का बहुप्रतीक्षित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (रक्त पृथक्करण इकाई) एक साल बाद भी चालू नहीं हो पाया है। दिसंबर 2024 में राज्यपाल की ओर से विधिवत उद्घाटन किए जाने के बावजूद यह यूनिट अब तक केवल सफेद हाथी बना हुआ है। स्टाफ की कमी और लाइसेंस न मिलने के कारण मशीनें धूल फांक रही हैं और मरीजों को खून के अतिआवश्यक घटक जैसे प्लेटलेट्स, प्लाज्मा या आरबीसी के लिए चंडीगढ़ स्थित पीजीआई या अन्य बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। सितंबर 2022 में रेडक्रॉस सोसायटी की पहल पर राज्यपाल ने ब्लड बैंक का शुभारंभ किया था। दिसंबर 2024 सीएसआर फंड से अलग कमरे का निर्माण कर ब्लड सेपरेशन यूनिट की मशीनें लगाई गईं। राज्यपाल ने इसका उद्घाटन भी कर दिया था। उद्घाटन को 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन यूनिट पूरी तरह से बंद है। अस्पताल में जब भी किसी गंभीर रोगी को रक्त के घटकों (कंपोनेंट्स) की तुरंत जरूरत होती है, तो उन्हें तत्काल रेफर कर दिया जाता है, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ जाती है और परिजनों को अनावश्यक आर्थिक व मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है। ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. मनिका शर्मा ने बताया कि यूनिट को शुरू करने के लिए अभी कुछ और उपकरणों की आवश्यकता है। साथ ही, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण लाइसेंस के लिए भी आवेदन नहीं किया जा सका है। लाइसेंस के लिए स्टाफ का पूरा विवरण देना अनिवार्य होता है। खंड स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कविराज नेगी ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जैसे ही पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होता है, लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी।
लोग लंबे समय से कर रहे मांग
नालागढ़ क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि यहां खून के अलग-अलग कंपोनेंट उपलब्ध हों ताकि गंभीर मामलों में मरीजों को तत्काल राहत मिल सके। लेकिन एक साल से ठप पड़ी यूनिट ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
कोट
इस विषय में उच्चाधिकारियों से बात करेंगे और सेपरेशन यूनिट को यथाशीघ्र शुरू करवाने का प्रयास करेंगे, जिससे मरीजों को रक्त कंपोनेंट्स के लिए चंडीगढ़ न जाना पड़े।
नरेंद्र आहलूवालिया, एसडीएम,नालागढ़