प्रदेश की औद्योगिक राजधानी बीबीएन में रेल लाईन बिछाने की चल रही धीमी प्रक्रिया से बीबीएनआईए भी आहत है।
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प्रदेश की औद्योगिक राजधानी बीबीएन में रेल लाईन बिछाने की चल रही धीमी प्रक्रिया से बीबीएनआईए भी आहत है। कालका-चंडी से होते हुए बद्दी को जोड़ने वाली रेलवे लाइन के सर्वेक्षण के लिए आंके 385.75 करोड़ रुपये में में से 255 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं। इसके लिए जमीनों के अधिग्रहण का कार्य चला था लेकिन यह कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
बद्दी-बरोटीवाला को कालका से चंडी मंदिर होते हुए बद्दी रेल लिंक से जोड़ने के लिए उद्योग जगत ने कई बार मांग उठाई थी। बीबीएनआईए ने अपने स्तर पर भी आरआरबी सहित प्रदेश और केंद्र सरकार से पुरजोर ढंग से पैरवी की। अब बीबीएनआईए दोबारा इस रेल लाइन की प्रक्रिया की वास्तविकता जानने के लिए पत्राचार करेगी। रेल लाइन की दरकार से महरूम बीबीएन के उद्यमियों सहित लोगों की यह चिरलंबित मांग अभी तक परवान नहीं चढ़ी है। रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (आरआरबी) चंडीगढ़ की टीम ने पड़ोसी राज्य हरियाणा के सूरजपुर से बद्दी तक बनने वाले रेलवे ट्रैक का सर्वे पहले ही कर लिया है।
इसमें हरियाणा के सूरजपुर से धमाला - लोहगढ़ - खेड़ा-टांडा-जोलूवाल-कोना-मढ़ावाला-कंटनेर डिपो बद्दी-हरिपुर संडोली ट्रैक शामिल है। इससे पूर्व भी बद्दी से कालका के बीच में बड़ी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण वर्ष 2012 में हुआ था। एक अप्रैल 2012 को इसकी रिपोर्ट सौंपी थी। बीबीएनआईए के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा राज्य में इस रेलवे लाइन का हिस्सा आ रहा है जहां थोड़ी रुकावट हो रही है। इसके लिए बीबीएनआईए जल्द ही आरआरबी और केंद्र सरकार से पत्राचार करके इसकी सच्चाई का पता लगाएगा।
बिना रेलवे के चल रहा 14.42 करोड़ का कंटेनर डिपो
केंद्र द्वारा प्रदेश सरकार के प्रयासों से बद्दी के मलपुर में 92 बीघा लैंड पर कंटनेर डिपो बनकर तैयार हो गया है। लेकिन बिना रेल लाइन सुविधा के ही यह कंटेनर डिपो चल रहा है। इस कंटनेर डिपो के लिए केंद्र सरकार ने 14.42 करोड़ की धनराशि मुहैया करवाई है। काम पूरा होने के बाद इसका उद्घाटन भी हो चुका है। कंटेनर डिपो का असल लाभ तो तभी मिल पाएगा जब यह क्षेत्र रेलवे सुविधा से लैस होगा।