प्रशासन और ऑटो यूनियन की तकरार के बीच जिला प्रशासन ने नियम पूरे करने वाले ऑटों चालकों को सड़कों पर फिलहाल ऑटो दौड़ाने की इजाजत दे दी है। तमाम कायदों पर खरे उतरने वाले अगर ऑटो चलाते हैं तो सुरक्षा प्रशासन मुहैया करवाएगा। हालांकि चेकिंग बराबर रहेगी।
ओवरलोडिंग, अधूरे लाइसेंस, सबलेटिंग पर पैनी नजर रहेगी। नियमों की अवहेलना पर चालान काटे जाएंगे। ऑटो जब्त भी होंगे। उपायुक्त सोलन डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि जनसुविधा और शूलिनी मेले को ध्यान में रखकर ऑटो चलाने की तमाम औपचारिकता पूरी करने वाले ऑटो चालक सोलन शहर में ऑटो चला सकते हैं।
ऐसे ऑटो चालकों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन सुरक्षा की गारंटी देगा। बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस में एलएमवी के साथ ऑटो मैक्सी कैब, ऑटो में 3+1 सवारियां और सबलेटिंग न करने की शर्त रहेगी। इन नियमों की अवहेलना करते हुए यदि कोई ऑटो चालक पकड़ा जाता है तो उस पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।
सोमवार को खूब दौड़ी मुद्रिका, राहत
सोमवार से निजी बसों के मुद्रिका के रूप में चलने से सवारियों को खासी राहत मिली। रबौण, कोटलानाला, चंबाघाट, शामती दोहरी दीवार, सपरुण चौक आदि से मुद्रिका सेवाएं खूब दौड़ी। सवारियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं हुई। लोग को काफी कम किराए की दरों में अपने गंतव्य तक पहुंचे।
न लगा जाम और ट्रैफिक भी व्यवस्थित
शहर में ऑटो न चलने से बेशक कुछ लोगों को परेशानी हो रही हो, लेकिन जाम से सैकड़ों लोगों को राहत मिली है। वहीं ट्रैफिक भी व्यवस्थित है। खुली सड़कों पर आरामदेह सफर का अनुभव हो रहा है। शहर में करीब 350 ऑटो दौड़ते हैं। ऑटो के पहिये थमने से जाम से काफी निजात मिली है।
तो आज होगा फैसला
ऑटो यूनियन और प्रशासन के बीच आज दोबारा बातचीत हो सकती है। ऑटो यूनियन के प्रतिनिधियों के मुताबिक इस संबंध में वह मंगलवार को स्थानीय प्रशासन के समक्ष अपनी मांगे रख सकते हैं। ताकि शहर में ऑटो चलने की व्यवस्था हो सके। ऑटो हड़ताल के कारण कई परिवारों को भूखे रहने की नौबत आ गई है।
यह है पूरा मामला
3+1 सवारियों की शर्त, भारी भरकम चालान और डीएल में ऑटो पैसेंजर कैब की शर्त में छूट की मांग करते हुए ऑटो यूनियन प्रशासन से मिली। लेकिन बात नहीं बनी। अचानक यूनियन ने ऑटो का किराया खुद ही डबल कर दिया। किराया बिना प्रशासन की मंजूरी के बढ़ाया गया। प्रशासन ने सख्ती अपनाई।
ओवलोडिंग, सबलेटिंग पर शिकंजा कसा। रोष जताते हुए यूनियन ने शहर में ऑटो चलाने से इंकार कर दिया। सभी वार्ता विफल रहने के बाद रविवार को उपायुक्त सोलन के आदेश पारित करते हुए सरकारी के साथ निजी बसें शहर में बतौर मुद्रिका चलाने को मंजूरी दे दी।