दोबारा बिजाई का समय आया पर पिछले साल की रकम अटकी
विभाग और सरकार के ढुलमुल रवैये से किसान नाराज, बीज तैयार करने से लगे कतराने
बद्दी (सोलन)। एक तरफ जहां रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही खेतों में दोबारा गेहूं की बिजाई का दौर शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर नालागढ़ क्षेत्र के अन्नदाता पिछले साल की अपनी ही फसल का भुगतान पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। सरकार और कृषि विभाग की लचर कार्यशैली के कारण किसानों का मोह अब बीज उत्पादन से भंग होने लगा है। बीते वर्ष नालागढ़ उपमंडल में 295 किसानों ने प्रमाणित गेहूं का बीज तैयार किया था। इनमें से 89 किसानों ने तो खुले बाजार में अपनी उपज बेच दी, जबकि 205 किसानों ने विभाग पर भरोसा जताते हुए अपना गेहूं सरकारी तंत्र को सौंपा था। सामान्य गेहूं के मुकाबले बीज वाला गेहूं एक हजार रुपये प्रति क्विंटल तक अधिक दाम पर बिकता है, जिसे देखकर किसान इस मेहनत वाले काम को अपनाते हैं। लेकिन पिछले दो वर्षों से समय पर भुगतान न मिलने के कारण अब किसानों का इस व्यवस्था से भरोसा उठने लगा है।
खेड़ा गांव के किसान अवतार सिंह का कहना है कि आज भी करीब 90 किसानों को उनके गेहूं का भुगतान नहीं मिल पाया है। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि किसान अपनी पहली फसल बेचकर मिलने वाले पैसों से ही अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी संसाधन जुटाते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि एक पूरी फसल बीत चुकी है और दोबारा बिजाई का समय आ गया है, फिर भी किसानों के हाथ खाली हैं। वहीं, नंदपुर पंचायत के किसान सौढ़ी राम और अमर चंद ठाकुर ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग और सरकार का रवैया ऐसा ही बना रहा, तो आने वाले समय में सरकारी विभागों को बीज तैयार करने के लिए एक भी किसान नहीं मिलेगा।
कोट
कृषि विभाग के उपनिदेशक अजैब सिंह नेगी ने सफाई देते हुए कहा कि विभाग की ओर से सभी संबंधित किसानों के एक करोड़ 29 लाख रुपये के बिल ट्रेजरी में जमा करा दिए गए हैं। इसका टोकन भी कृषि निदेशालय को भेजा जा चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही किसानों के खातों में उनके बीज का पैसा आ जाएगा।