रामलोक मंदिर के विवादित बाबा अमरदेव पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज न होने से गुस्साए लोगों ने मालरोड पर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने राजनैतिक दबाव में कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए पुलिस कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। लोगों ने कहा कि कथित बाबा पर गिरफ्तारी की कार्रवाई छोड़कर पुलिस उसे आईजीएमसी में वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाने में जुटी है।
हमले का शिकार महिला अभी भी क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में दाखिल है। इसकी सही तरीके से सुध नहीं ली जा रही है। बाबा अवैध तरीके से मंदिर के नाम पर अतिक्रमण कर रहा है। आसपास के गांवों में माहौल भी खराब कर रहा है। गांव में तनाव का माहौल है। कथित बाबा को क्षेत्र छोड़ने के लिए कई बार प्रशासन के माध्यम से गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी है। लिहाजा अब यदि कोई घटना घटती है तो इसका जिम्मेवार प्रशासन होगा।
रैली में कंडाघाट उपमंडल की कई पंचायतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बाबा अमरदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पंचायत प्रधान सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने प्रशासन और सरकार को पहले ही चेताया था कि यदि कथित बाबा पर सरकार तथा प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो दो मई को धरना दिया जाएगा। इसके तहत रैली और धरना प्रदर्शन किया गया। रैली विश्राम गृह से डीसी चौक तक पहुंची। इसके बाद एडीएम संदीप नेगी को ज्ञापन सौंपा। रैली में लोकेश्वर शर्मा, प्रधान बसाल दवेंद्र कश्यप, तुदंल के प्रवीन, दंघील की लज्जा देवी, बाजणी से सुरेंद्र, श्रीनगर से अमित ठाकुर, क्वागर से आरती, मही से नंद किशोर, डांगरी से पिंकी देवी, कोठो पंचायत विकास ठाकुर, बीशा से सीता ठाकुर, बाशा से नीशा शर्मा, योगेश, अमर ठाकुर, सुरेंद्र, जितेंद्र, प्रेम कश्यप, सहित दर्जनों पंचायत प्रधानों सहित सैकड़ों लोगों सहित महिलाओं ने भाग लिया। एडीएम संदीप नेगी ने कहा कि इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञापन में यह लगे हैं आरोप
बाबा अमरदेव को अभी तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार न करके उचित धारा न लगाकर उल्टा वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। सरकारी भूमि और पंचायत की जमीन पर नाजायज कब्जे सहित बिना मंजूरी के पेड़ काटना, अवैध कब्जा करने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों सहित ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप बाबा पर लग रहे हैं। धमकी की एक शिकायत कंडाघाट में दर्ज है। 2016 में छापे में चार तेंदुए और बाघ की खाल मिलने के बाद भी इसकी रिपोर्ट अभी तक न मिलना और न ही उस पर कार्रवाई न करना शामिल है।
कहां से आ रहा करोड़ों का फंड
ग्रामीणों ने हैरानी जताई कि मंदिर के नाम पर करोड़ों रुपये निवेश किए जा रहे हैं। लोगों ने सवाल किया कि इतना पैसा कहां से आ रहा है? ऊंची और महंगी धातुओं की मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं। अन्य साजोसामान के लिए भी भारी रकम खर्ची जा रही है। बाबा को इतनी फंडिंग कौन और किस मकसद से हो रही है, इसकी सीबीआई से जांच होनी चाहिए।