दिनरात चलने वाली कई सीएचसी मात्र एक चिकित्सक के भरोसे
पट्टा सीएचसी में तैनात चिकित्सक की तीन दिन नालागढ़ में लगाई ड्यूटी
दिग्गल सीएचसी एक साल से खाली, 50 हजार से ज्यादा आबादी परेशान
ओमपाल सिंह
बद्दी(सोलन)। स्वास्थ्य मंत्री के अपने जिले के बीबीएन में स्वास्थ्य सुविधाएं भगवान भरोसे चली हुई है। यही कारण है कि पट्टा महलोग में महिला की जान चली गई। दून के पहाड़ी क्षेत्र की तीन पीएचसी है। सभी पीएचसी में स्टाफ की कमी है। चंडी व पट्टा सीएचसी को 24 घंटे खुला रखने के आदेश है लेकिन यहां पर चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है। पट्टा सीएचसी में दो चिकित्सक है। एक चिकित्सक मात्र तीन दिन के लिए पट्टा में बैठता है उसके बाद उनकी नालागढ़ अस्पताल प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। नालागढ़ अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक का पद लंबे समय से खाली पड़ा हुआ है। उसके बाद पट्टा सीएचसी एक मात्र चिकित्सक के भरोसे चल रही है। यहां पर अकेला चिकित्सक 24 घंटे कैसे ड्यूटी कर सकता है। शनिवार को यहां महिला की बिना जांच किए ही मौत हो गई है। चंडी में भी दो ही चिकित्सक है। यहां पर इन्हीं दो से काम चलाया जा रहा है। बरोटीवाला में सीएचसी का दर्जा दिया गया है। इस सीएचसी को सी ग्रेड का दर्जा दिया गया है। यह सीएचसी चार बजे बंद हो जाती है। यहां लैब तकनीशियन है लेकिन प्रयोगशाला का सामान न होने से उसे डेपुटेशन पर बद्दी लगाया हुआ है।
बरोटीवाला के राजेंद्र राणा व पूर्व बीडीसी सदस्य अनिल शर्मा ने बताया कि इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री व सीएमओ को मेल भेज कर अवगत कराया गया है। लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीएम ने 30 बेड के इस अस्पताल का उद्घाटन तो कर दिया लेकिन सुविधाएं आज तक नहीं मिली है।
नालागढ़ अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट पिछले चार साल से नहीं है। यहां पर रोगियों को बाहरी क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड करना पड़ रहा है। यहां पर लोग लंबे समय से अल्ट्रासाउंड का कार्य आउटसोर्स पर देने की मांग कर रहे है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यहां पर ईएनटी का पद भी खाली है। जिससे रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। नालागढ़ के अलावा रामशहर, दिग्गल व लोहारघाट में सीएचसी है। वहां पर स्टाफ की कमी है। दिग्गल सीएचसी में चिकित्सकों के दो पद है। जिसमें एक पद खाली है। और एक पद पर तैनात चिकित्सक पिछले साल से अवकाश पर है। यहां पर पीएचसी से चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। लेकिन अधिकांश समय फार्मासिस्ट ही इसे चला रहा है। लोहारघाट सीएचसी एक ही चिकित्सक के भरोसे चल रहा है। चिकित्सक के अवकाश पर यहां अन्य जगह पर जाने से यहां पर फार्मासिस्ट ही रोगियों को देखता है। रामशहर सीएचसी को 24 घंटे चलाने के ऑर्डर पूर्व सरकार ने किए थे लेकिन आज तक यह रात के समय चालू नहीं हो पाई। आपातकाल में डॉक्टर को कॉल करके बुलाया जाता है जो केवल रोगी को रेफर ही करता है। इसलिए लोगों ने अब डॉक्टर को बुलाना ही छोड़ दिया है।
नालागढ़ के पूर्व विधायक लखविंद्र सिंह राणा ने कहा कि भाजपा ने नालागढ़ को 100 बेड का अस्पताल खोला था। लेकिन वर्तमान सरकार ने आते ही उसका दर्जा कम कर दिया है। उसके बावजूद भी अस्पताल में रिक्त पद भरने में सरकार पूरी तरह से असमर्थ रही है। जिससे रोगियों को पीजीआई व निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
कोट
उधर, सीएमओ डॉ. अजय पाठक ने बताया कि रिक्त पदों को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाता है। जैसे ही नई नियुक्ति होती है तो खाली पदों को भर दिया जाएगा। - डाॅ. अजय पाठक्र सीएमओ