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सोलन में 40 लाख में दीयो का कारोबार, कारीगरों की खल रही कमी

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सोलन में 40 लाख के दीया कारोबार को नहीं मिल रहे कारीगर
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शहर में 80 दुकानों पर बिकेंगे दीये; अंबाला, दिल्ली और चंडीगढ़ से करनी पड़ रही खरीदारी
चीनी लाइटों को लोगों की ना, मिट्टी के दीयों की तरफ बढ़ा रुझान
सतवीर सिंह
सोलन। शहर में दिवाली के लिए सजी दुकानों में चीनी सामान कहीं देखने को नहीं मिल रहा। लोगों और दुकानदारों का मिट्टी के दीयों की तरफ रुझान बढ़ गया है। सोलन शहर में दिवाली पर 40 लाख के दीये घरों को रोशन करेंगे। स्थानीय कारीगरों के लुप्त होने से अंबाला, दिल्ली, चंडीगढ़ से दीयों की खरीदारी कारोबारियों की मजबूरी है। ये दीये सोलन शहर के बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हो गए हैं।
दिवाली पर औसतन 50 हजार रुपये की बिक्री एक दुकानदार करता है। सोलन शहर में 80 दुकानदार दिवाली के मौके पर दीयों को बिक्री के लिए रखते हैं। यहां खरीदारी के लिए ग्रामीणों इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। सोलन शहर में खुद की पंजीकृत आबादी करीब 60 हजार हैं जबकि यहां करीब एक लाख से ज्यादा लोगों की रिहायश है। इनमें बड़ी संख्या में वे लोग शामिल हैं जो बाहर से यहां काम धंधा या पढ़ाई करने के उद्देश्य से पहुंचे हैं। इसके अलावा सिरमौर और शिमला के निकटवर्ती ग्रामीण इलाकों के लिए सोलन का बाजार ही सबसे नजदीक पड़ता है। ऐसे में त्योहार के दौरान वे खरीदारी करने के लिए यहां आते हैं। कारोबारियों को दिवाली पर 50 हजार या इससे अधिक तक बिक्री की उम्मीद है। मजेदार बात यह है कि सोलन शहर के ज्यादातर कारोबारी चीनी सामान को न कह चुके हैं और घरों में बने दीयों की मांग ज्यादा है। सोलन में मिट्टी के बर्तन खासतौर पर दीयों का व्यापार करने वाले कारोबारी नीलम ने बताया कि दिवाली को लेकर दीये बेचने का कारोबार शुरू हो चुका है। नीलम ने कहा कि दिवाली तक 50-60 हजार तक कारोबार हो जाता है। बाहर से सामान लाने पर आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। नरेश कुमार ने बताया कि अब बाजार में चीनी सामान का प्रचलन बंद हो चुका है। लोगों का रुझान मिट्टी के बर्तनों की ओर बढ़ रहा है।
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किसी को नहीं दे सकते थोक में
दिवाली को लेकर यदि कोई भी इन दीये को थोक में लेना चाहे तो चाहते हुए भी इनको थोक में नहीं दे सकते हैं। सोलन में दिवाली के समय में अधिक मात्रा में लगने वाले दीये को बनाने वाला कोई कारीगर न होने से लोगों को चंडीगढ़, दिल्ली, अंबाला से ही खरीदारी करनी पड़ती है। इससे इनकी आर्थिक अवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है।
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12 महीने रहती है मिट्टी के बर्तनों की मांग, इन्हें मानते हैं शुभ
सोलन में मिट्टी के बर्तनों का कारोबार करने वाले संजीव कुमार ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों की मांग 12 महीने रहती है। लोग शुभ कार्यों को लेकर मिट्टी के बर्तनों को लेना ही शुभ मानते हैं। इनको बनाने वाले न होने से व्यापारियों को बाहर से सामान को खरीदना पड़ रहा है।
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