दून वैली स्कूल नालागढ़ में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दून वैली पब्लिक स्कूल, नालागढ़ में शिक्षकों के लिए विद्यालयों में लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। जिसमें स्कूल के 60 अध्यापकों ने भाग लिया। कार्यक्रम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रशिक्षण इकाई के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को लैंगिक समानता, संवेदनशीलता एवं समावेशी शिक्षा के प्रति जागरूक एवं सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम में दो अनुभवी एवं प्रतिष्ठित संसाधन व्यक्तियों ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। इतिहास के व्याख्याता राम कुमार शर्मा इतिहास के व्याख्याता ने अपने दीर्घ अनुभव एवं ज्ञान से शिक्षकों को विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। वहीं विवेक स्कूल चंडीगढ़ की पीजीटी श्रुति ढढवाल ने अपनी विशेषज्ञता एवं व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से सत्र को अत्यंत प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक बनाया।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को लैंगिक संवेदनशीलता से जुड़े विभिन्न ने अवधारणाओं एवं व्यावहारिक पहलुओं को गतिविधि-आधारित एवं संवादात्मक माध्यम से समझाया गया। विभिन्न रोचक गतिविधियों, उदाहरणों एवं समूह-चर्चाओं के माध्यम से शिक्षकों ने लैंगिक पूर्वाग्रह, समान अवसर, सम्मानजनक व्यवहार, समावेशिता तथा विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को बेहतर ढंग से समझा।
सत्र का मुख्य उद्देश्य विद्यालय में ऐसा वातावरण विकसित करना रहा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी को बिन किसी लैंगिक भेदभाव के समान अवसर, सम्मान, सुरक्षा और अपनी क्षमताओं को विकसित करने की स्वतंत्रता प्राप्त हो। संसाधन व्यक्तियों ने शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे अपने दैनिक शिक्षण-अधिगम व्यवहार में संवेदनशील एवं समावेशी दृष्टिकोण अपनाएं तथा विद्यार्थियों में समानता, सम्मान और पारस्परिक सहयोग की भावना को मजबूत करें।
कार्यक्रम के दौरान विषय से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा एवं विचार-विमर्श भी किया गया। शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए तथा विद्यालयी परिवेश में लैंगिक संवेदनशीलता को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए उपयोगी सुझाव प्राप्त किए।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि ऐसे क्षमता निर्माण कार्यक्रम शिक्षकों के विकास के साथ-साथ विद्यालय में सकारात्मक, सुरक्षित, समानतापूर्ण एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।