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बीबीएन में बारिश और तूफान से गेहूं की फसल बर्बाद

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30 फीसदी नुकसान का अनुमान - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (सोलन)।
बीबीएन में बारिश ने गेहूं की फसल को तबाह कर दिया है। कटाई से पहले गेहूं की फसल पर मौसम का कहर बरपा। तेज आंधी तूफान और बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

बीबीएन के मैदानी इलाकों में गेहूं की खड़ी फसल खराब मौसम की भेंट चढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि करीब 30 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचा है। बैसाखी पर्व दो दिन बाद है। बारिश के कारण बैसाखी से पहले किसान फसलें नहीं काट पाए। जिन किसानों ने फसलें काट दी हैं उन पर इंद्रदेव की नाराजगी भारी पड़ गई है। बारिश के साथ तूफान से खेतों में खड़ी फसलें गिर गई हैं। फसल गीली भी हो गई है। बैसाखी पर्व आते ही उपमंडल में फसलों की कटाई पूरी हो जाती थी।
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किसानों के मुताबिक वे बैसाखी से पहले फसलों की कटाई पूरी कर लेते थे। इसके बाद वे बैसाखी पर पवित्र स्थलों पर जाकर स्नान करते थे। उसके बाद फसलों की बिजाई का काम शुरू करते थे। इस बार के मौसम ने किसानों से यह अवसर छीन लिया है। इस वर्ष अप्रैल में आंधी तूफान के साथ हो रही बारिश ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है। किसान प्रेम चौधरी ने कहा कि पहले किसान तय समय में फसलों की खेती करते थे। समयबद्ध तरीके से फसलों की कटाई करते है। इस बार मौसम ने इस तरह से दगा दिया कि किसान पहले तो फसलों की बिजाई के दौरान बारिश को तरसते रहे, जब कटाई का समय आया तो बारिश कहर बरपा रही है।
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किसान फसल बीमा कराएं : देसराज
फसल विशेषज्ञ देसराज ठाकुर ने कहा कि किसानों ने खेतों में पानी लगाया हुआ था। इससे फसल में नमी थी। बारिश से उसकी जड़ें कमजोर हो गईं। इससे गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। काटी गई फसलों के बंडलों को सूखाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए चलाई गई है, लेकिन किसान इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। किसान फसलों का बीमा करवाएं ताकि उन्हें मुआवजा मिल सके।

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