फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर के मालरोड से मापी जा रही कांगड़ा की सियासी हवा

विज्ञापन
netaji
विज्ञापन
सोलन। चुनाव के प्रचार का शोर थम चुका है। अब सिर्फ मतदाताओं का जोर बाकी है। बड़ी-बड़ी रैलियां और जनसभाएं छोटी नुक्कड़ सभाओं में बदल गईं। हालात और हवा देखकर आंकड़ों का पता करने में जुटे माहिर हर चौराहे पर मौजूद हैं। राजनीति में नौसिखिए भी चाणक्य की भूमिका में पूरी शिद्दत से जोड़ जमा कर अपने चहेते की सरकार बनाने में जुटे हैं।
विज्ञापन

मालरोड पर शहर का सबसे व्यस्त कैफे है जहां बुजुर्ग, नेता और छात्र हमेशा मौजूद रहते हैं। ये कैफे आज बहस का केंद्र बना हुआ है। कई धड़े यहां मंडली बनाकर सरकार के जोड़तोड़ में लगे हैं। चौपाल से सोलन घूमने आए दो युवक एक-दूसरे को हिमाचल की सभी सीटों का हिसाब गिनवा रहे थे। भरमौर से सिरमौर तक सभी विधानसभा सीटों की गिनती उन्हें उंगलियों पर याद है। हालांकि वे हर एक सीट पर चहेती पार्टी के ही प्रत्याशी को आगे रखकर बात करते रहे हैं। लेकिन इस बहस की मजेदार बात यह रही कि उन्हें सभी विधानसभा सीटों में मुख्य दोनों राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों के नाम याद थे। बहस के बीच में खलल डालने पर दोनों ने बताया कि उनका ट्रांसपोर्ट का कारोबार है और वे पूरे हिमाचल में घूमते फिरते रहते हैं। इसी वजह से उन्हें सभी सीटों का अंकगणित पता है।
सोलन शहर का चिल्ड्रन पार्क दूसरी सबसे ज्यादा व्यस्त जगह है। यहां इन दिनों हर कोई धूप सेंकने के लिए खड़ा रहता है। यहां सजी चौपाल में नेताओं पर चर्चा हो रही थी। इस चर्चा में मशगूल बुजुर्ग सरकार बनाने में अपने तर्क देते नजर आए। किसी ने इस विधानसभा चुनाव को केंद्र बनाम हिमाचल का रूप दिया तो किसी ने मुख्यमंत्री के चेहरों पर अपने तर्क दिए। करीब एक घंटे से ज्यादा देर तक चलती रही इस बहस का विषय हिमाचल में सरकार किसकी बनेगी रहा। बुजुर्ग दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों को चारों लोकसभा सीटों के आधार पर माप कर देख रहे थे। यह लोग सोलन के चिल्ड्रन पार्क से कांगड़ा संसदीय क्षेत्र की 20 विधानसभा सीटों की हवा को मापने में लगे थे। राजनीति की इस चर्चा में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। कथेड़ वार्ड में महिलाएं बुधवार को सरकार बनाने की चर्चा में शामिल मिलीं। यहां धूप का आनंद लेने के साथ ही कोई वीरभद्र सिंह तो कोई प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री का दावेदार मानता रहा। बहरहाल, शोरगुल के बाद निजी तौर पर छिड़ी इस बहस से तय है कि मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है और चेहरा भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह या प्रेम कुमार धूमल में से किसी एक का होगा। लेकिन राजनीति का असली ज्योतिषी कौन साबित होता है इसका फैसला दिसंबर माह की 18 तारीख को मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें