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धनतेेरस का शुभ लग्न आज बाजार में भीड़ से छाई रौनक

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सोलन। धन दौलत और आरोग्य देने वाला पर्व धनतेरस मंगलवार को मनाया जाएगा। सुबह 9 से 11:25 बजे तक चर स्थिर लग्न अत्यंत ही शुभ है। इस मुहूर्त में खरीददारी करना शुभकारी माना जाता है। इस दिन खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त सुबह से शाम तक रहेगा। धनतेरस कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की धन त्रियोदशी के रूप में मनाया जाता है। यह दीपावली के आने की शुभ सूचना है।
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ज्योतिष्यचार्यों का दावा है कि 17 अक्तूबर के दिन मंगलवार को आने वाली धन त्रयोदशी नक्षत्रों के अनूठे संयोग के साथ आ रही है जो अत्यंत शुभदायक है। पंडित हेमराज के अनुसार ऐसी शुभ दशा आने वाले निकट भविष्य में नहीं होने वाली है। ऐसे शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी की वैदिक पूजा अतुलनीय फल की प्राप्ति देने वाली होती है शास्त्रों के अनुसार ऐसा शुभ मुहूर्त 47 सालों के बाद बन रहा है। इस दिन मां लक्ष्मी का विधिवत आह्वान कर भक्त मां का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। लक्ष्मी पूजन का उत्तम समय सवा सात से सवा नौ बजे तक रहेगा। इस पर्व के तीसरे दिन दीवाली का शुभ त्योहार मनाया जाता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से ही हो जाती है।
धनतेरस के दिन वैद्य धन्वंतरि के पूजन का विधान शास्त्रों में बताया है। इस दिन धन्वंतरि वैद्य समुद्र से अमृत लेकर आए थे। इसलिए धनतरेस को धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाया जाता है। धन्वंतरि को चिकित्सकों का देवता भी कहा जाता है। इसलिए धनतेरस का दिन चिकित्सकों के लिए विशेष महत्व रखता है इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। धनतेरस के दिन चांदी खरीदने का विशेष महत्व है। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि चांदी चंद्रमा का प्रतीक है जो जीवन में शीतलता प्रदान करता है। मन में संतोष रूपी धन का वास होता है, संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ और सुखी है।
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