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प्राचीन बावड़ी को संवारकर दिया नया स्वरूप, जनता हुई खुश

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नवनिर्मित बावड़ी में हैंडपंप से पानी भरती एक महिला। - फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। आमवाला सैनवाला पंचायत जल संरक्षण में बेहतरीन कार्य कर रही है। यहां जल शक्ति अभियान के तहत श्रमदान से चार जोहड़ तैयार करने के बाद 150 साल पुरानी बावड़ी को नया जीवन दान दिया गया है। सैनवाला में सलानी कटोला मार्ग पर गांव के उत्तर पश्चिम में सड़क किनारे बनी बावड़ी जर्जर हालत में पहुंच चुकी थी जिसे पंचायत प्रधान संदीपक तोमर के प्रयासों से नया रूप दिया गया है।
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बावड़ी को चारों ओर से कवर किया गया है जिसे लोहे के गेट से बंद कर दिया गया है। लोगों को बावड़ी के भीतर गए बिना पानी बाहर ही मिले इसके लिए हैंडपंप की व्यवस्था भी की गई है। बावड़ी के साथ बने महिला स्नानाघर की मरम्मत कर उनको भी नया रूप दिया गया है। बावड़ी और स्नानाघर की दीवारों को बहुत आकर्षक ढंग से सजाया भी गया है जिसकी पूरी पंचायत में तारीफ हो रही है।
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क्या कहते हैं क्षेत्र के ग्रामीण
1. जिले भर में ऐसी नहीं होगी बावड़ी : शौकीन चंद
ग्रामीण शौकीन चंद का कहना है कि यह बावड़ी 150 साल पुरानी थी जिसे बहुत सुंदर और सुरक्षित ढंग से संवारा गया है। यह बेमिसाल कार्य है। ऐसी बावड़ी पूरे जिले में नहीं होगी।
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2. संदीपक जैसे प्रधान हों तो बने बात: चिरआनंद
स्थानीय निवासी चिरआनंद का कहना है कि जल संरक्षण में प्रधान संदीपक तोमर ने अद्भुत कार्य किया है। संदीपक जैसे प्रधान सभी जगह हों तो ग्रामीणों को कोई दिक्कत न हो।
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3. लोगों को मिलेगा अब शुद्ध पानी : अनिल
स्थानीय निवासी अनिल गुप्ता का कहना है कि बावड़ी का पानी पीने लायक नहीं था। पहले कुत्ते और दूसरे जानवर इसे गंदा कर रहे थे। अब इसे कवर किया गया है। हैंडपंप से बाहर ही शुद्ध पानी लोगों को मिलेगा।
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4. हैंडपंप का इस्तेमाल अनूठा उपयोग : ओम प्रकाश
जबकि ओम प्रकाश का कहना है कि बावड़ी का पानी हैंडपंप के जरिए बाहर ही लोगों को उपलब्ध करवाना यह दूरदर्शी प्रधान ही कर सकता है। मेरा घर समीप ही है अब इसका पानी घर भी ले जा सकते हैं।
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5. जल संरक्षण में हो रहा बेहतरीन कार्य : सुरेंद्र मोहन
स्थानीय निवासी सुरेंद्र मोहन का कहना है कि यहां विकासात्मक कार्यों के साथ जल संरक्षण में बेहतरीन कार्य हो रहा है। पहले श्रमदान से जोहड़ और अब बावड़ी को अनूठे तरीके से संवारना बेमिसाल है।
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6. दसाई के समय भी मिलेगा लाभ : सतीश सैनी
सतीश सैनी का कहना है कि यह बावड़ी श्मशानघाट जाने वाले रास्ते के बीच में हैं। अंतिम यात्रा के दौरान और दसाई पर लोगों को इसका लाभ मिलेगा। यह बहुत सुंदर ढंग से संवारी गई है।
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