पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब की यमुना नदी, बाता सहायक नदी और जंबूखाला के तटीकरण के लिए पिछले चार वर्षों से 251 करोड़ रुपये बजट का इंतजार हो रहा है।
इस योजना से दर्जनों गांवों की करीब 480 हेक्टेयर भूमि कटाव से बचेगी। बजट प्रावधान नहीं हो पाने के चलते लोक निर्माण विभाग की यमुना नदी किनारे वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की प्रस्तावित योजना भी फाइलों में दफन होकर रह गई है।
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह सरकार के समय क्षेत्र के लोगों ने भूमि कटाव की समस्या रखी थी। वर्ष 2017 में केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधानशाला (सीडब्ल्यूपीआरएस) पुणे की टीम ने इस योजना के लिए निरीक्षण किया था। यमुना नदी तटीकरण योजना बनने से उत्तराखंड से हरियाणा की सीमा तक पंचायतों की 480 हेक्टेयर भूमि कटाव से बचेगी। यमुना नदी के तटीकरण योजना से उत्तराखंड के साथ लगते ग्राम पंचायत खोदरी, गोजर अडडेन, सिंघपुरा गुरुवाला, मानपुर देवड़ा, नवादा, कुंजा मतरालियों, पांवटा शहरी क्षेत्र के देवीनगर नदी किनारे और यमुना पुल से देईजी मंदिर घाट, भाटांवाली पंचायत से हरियाणा सीमा पर स्थित बातामंडी, बहराल पंचायत के यमुना नदी का संवेदनशील भूमि कटाव वाला करीब 22 किलोमीटर तथा सहायक बाता नदी तथा जंबूखाला का 15 किलोमीटर क्षेत्र का तटीकरण कार्य प्रस्तावित रहा है। बरसात में नदी क्षेत्र उफान पर रहने से हर वर्ष जानमाल की क्षति की आशंका बनी रहती है। तटीकरण से इन नदियों के किनारे सैकड़ों रिहायशी मकानों, औद्योगिक इकाइयों, बिजली बोर्ड, जलशक्ति विभाग की योजनाएं, उपजाऊ और व्यावसायिक भूमि को बरसात में क्षति होने से बचाने का लक्ष्य रहा है।
इनमें जलशक्ति विभाग के माध्यम से तैयार योजना को राज्य वित्त विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है। चार वर्ष पहले केंद्र सरकार से बजट के प्रावधान के लिए योजना भेजी गई है। स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार व विभाग से इस योजना को बजट स्वीकृति के लिए आग्रह किया जाएगा। संवाद