सर्वेक्षण का काम अंतिम चरण में, तकनीकी स्वीकृति के लिए बनाया जाएगा प्राक्कलन
कंसल्टेंसी फर्म पीएमयू मंडी शहर को तीन जोन में बांटकर कर रही सर्वे
शहर की 40 हजार से अधिक की आबादी को मिलेगी सुविधा
धर्म सिंह तोमर
नाहन (सिरमौर)। वर्ष 1621 में बसे ऐतिहासिक शहर नाहन आज भी रियासत काल की सीवरेज योजना के भरोसे चल रहा है। यहां की हर साल आबादी बढ़ रही है। करीब 5 हजार की आबादी के लिए बनाई योजना आज 40 हजार से अधिक लोगों की जरूरतों को पूरा कर रही है। अब शहर को आधुनिक सीवरेज योजना को लेकर कवायद तेज हुई है। नाहन के लिए स्वीकृत 144 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना को धरातल पर उतारने को लेकर काम शुरू हो गया है।
जल शक्ति विभाग की तरफ से योजना को आगे बढ़ाने को लेकर कंसल्टेंसी फर्म पीएमयू मंडी को सर्वेक्षण का काम दिया गया है। कंपनी की ओर से शहर को तीन जोन में विभाजित कर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका काम अंतिम चरण में है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद विभाग की ओर से योजना को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी स्वीकृति के लिए प्राक्कलन तैयार किया जाएगा। इसको लेकर काम किया जा रहा है। इसके बाद विभाग की ओर से योजना को अंतिम रूप देने के लिए टेंडर मांगे जाएंगे।
बता दें कि शहर में रियासत काल से चल रही सीवरेज व्यवस्था दशकों से जर्जर है। इसके चलते कई बार शहरवासियों को समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। इतना ही नहीं इस योजना में ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगाए गए हैं, जिसके चलते शहर से निकलने वाली गंदगी शहर के बाहर तीन बड़े नालों के माध्यम से खुले में चली जाती है। बरसात में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए समस्या भी बढ़ती है। योजना को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है।
तीन ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे
विभाग के अनुसार 144 करोड़ की योजना से जहां शहर के लोगों को आधुनिक सीवरेज सुविधा मिलेगी तो वहीं शहर की खुले में बहने वाली गंदगी से भी निजात मिलेगी। इसको लेकर शहर में आईटीआई के पास, जुड्डा का जोहड़ तथा जाबल का बाग में आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी काफी राहत मिलेगी।
नाहन में 144 करोड़ से प्रस्तावित आधुनिक सीवरेज योजना को लेकर प्रशासनिक अनुमति के बाद औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विभाग से संबंधित मंडी की फर्म शहर में सर्वेक्षण कर रही है। ये काम अंतिम चरण में है। सर्वेक्षण होने के बाद तकनीकी स्वीकृति के लिए प्राक्कलन तैयार किया जाएगा तथा टेंडर होंगे।
-राजीव महाजन, अधीक्षण अभियंता जलशक्ति विभाग