औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में कार्यरत कामगारों की आर्थिक परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। वहीं, उद्योगपतियों को आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कच्चे माल की खरीदारी और अन्य खर्चाें के लिए उद्योगपति को पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है। इससे उद्योगों का उत्पादन 50 फीसदी से भी अधिक प्रभावित हो गया है। कई उद्योगों में उत्पादन घटना विवशता बन गई है। नोटबंदी से कामगार वर्ग सबसे अधिक परेशान है।
हालात यह है कि नोटबंदी के बाद पहले तो उन्हें अपनी करेंसी बदलवाने के लिए बैंकों के आगे कतारें लगानी पड़ीं। अब वेतन मिलने के बाद भी कतारों में लगना पड़ रहा है। बैंकों में भी महज दो हजार या तीन हजार रुपये देकर चलता किया जा रहा है। इससे कामगारों को भारी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। कामगारों कमलेश, हरीश, संतराम, अशोक, रामदयाल, कुंदन, मेघराज, बिमला, सीता, राजरानी, रीना, स्नेहा, लता तथा कोमल ने बताया कि बैंकों में दो दिन लाइनों में घंटों लगने के बाद भी गुजारे लायक पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं। इसके चलते मकान का किराया, राशन का खर्चा तथा अन्य खर्चे चलाने में मुश्किल हो गई है।
नियोक्ताओं द्वारा वेतन का भुगतान पुराने नोटों में किए जाने से कामगारों को परेशानी हो रही है। उधर, उद्योगपतियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों में महेंद्र, देवेंद्र, राजकुमार, रवि तथा सुनील ने बताया कि बैंकों से तय सीमा में ही कैश मिल पा रहा है, जो खर्चे चलाने के लिए नाकाफी है। ऐसे में कामगारों को वेतन पुराने नोटों के माध्यम से दिया जा रहा है या फिर सीधे उनके बैंक खातों में डाला जा रहा है। बैंकों से सिर्फ पचास हजार तक ही कैश निकाल पा रहे हैं। जबकि, उद्योग चलाने के लिए सप्ताह में एक लाख से भी अधिक खर्चा आता है। ऐसे में उत्पादन घटना उनकी मजबूरी बन गई है। परिणाम स्वरूप उन्हें घाटा भी उठाना पड़ रहा है।