-बारिश न होने से लगातार घट रहा पेयजल योजनाओं का जलस्तर, विभाग कर रहा निगरानी
-शिलाई में सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं पेयजल योजनाएं
धर्म सिंह तोमर
नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर में भीषण गर्मी और लंबे समय से पर्याप्त बारिश न होने के कारण पेयजल संकट गहराता जा रहा है। आलम यह है कि जिले के नदी-नाले और पारंपरिक जल स्रोत दम तोड़ने लगे हैं। करीब दो दर्जन पेयजल योजनाओं का जलस्तर औसतन 25 फीसदी तक गिर चुका है। इससे आने वाले दिनों में जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत की आशंका बढ़ गई है।
सिरमौर में इन दिनों तापमान में हो रही रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम की बेरुखी और बारिश के अभाव में जल स्रोतों पर सीधा असर पड़ा है। दिन में गर्मी अधिक होने से नदी-नालों का पानी काफी कम हो गया है। कई छोटे नाले तो पूरी तरह सूख चुके हैं। विभागीय अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यदि जल्द ही बारिश नहीं होती है, तो विभाग के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि जिन क्षेत्रों में समस्या आ रही है वहां मशीनरी को ज्यादा समय तक चलाने के आदेश जारी किए गए हैं। कई योजनाओं को आसपास के अन्य जल स्रोतों से जोड़ा जा रहा है ताकि लोगों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।
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शिलाई और पच्छाद में स्थिति सबसे नाजुक
जिले के विभिन्न उपमंडलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विभाग के अनुसार शिलाई क्षेत्र की योजनाएं सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। इनमें गुम्माट, नैनीधार, केलवी डाहर, कुफ्फर, शमोग, डकार, पटाई टोल की धार, डाक्कर, गेजू, मटियाना, डिमाइना, कनीधारी चाकरी, अराना, उत्तरी, कोटी बडोल, कोटी बोंच और शिलाई विलेज जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा पच्छाद क्षेत्र में राजगढ़ सहित उपमंडल की कई पेयजल योजनाओं के जलस्रोत प्रभावित हैं। वहीं, नाहन के धारटीधार, जमटा आदि क्षेत्रों के अलावा पांवटा साहिब और संगड़ाह के ग्रामीण इलाकों में भी पेयजल स्रोतों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में ग्रामीणों को पेयजल किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है।
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दुरुपयोग पर विभाग सख्त, होगी कार्रवाई
जल संकट की गंभीरता को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने सभी 1400 योजनाओं के फील्ड स्टाफ को दैनिक निगरानी के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि पेयजल के दुरुपयोग पर किसी भी सूरत में नरमी नहीं बरती जाएगी। अधीक्षण अभियंता ई. राजीव कुमार महाजन ने बताया कि गर्मी के चलते जलस्तर में 25 प्रतिशत तक की कमी आई है। हम वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल करीब दो दर्जन पेयजल योजनाओं का जलस्तर कम हुआ है। लोगों को पानी का दुरुपयोग न करने को लेकर लगातार जागरूक किया जा रहा है। संवाद-