नाहन। जिला एवं सत्र न्यायालय ने जानलेवा हमले के एक मामले में तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने कहा कि आरोपी घटना के बाद जांच से बचते रहे। हथियारों की बरामदगी अभी बाकी है और ऐसे हालात में अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।
अभियोजन के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 को माजरा थाना क्षेत्र के एक गांव में खेत की जुताई के दौरान भूमि विवाद को लेकर झगड़ा हुआ। आरोप है कि सुरेंद्र सिंह, उसके पुत्र सौरव कुमार, गौरव कुमार तथा पड़ोसी दीपक कुमार सहित अन्य लोगों ने सजिद अली पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। हमले में सजिद अली गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें पहले पांवटा साहिब तथा बाद में नाहन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले में हत्या के प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराएं भी जोड़ दीं।
सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने दलील दी कि तीनों आरोपी घटना के बाद फरार रहे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो आरोपी कानून की प्रक्रिया से बचते हैं और जांच में शामिल नहीं होते, वे अग्रिम जमानत जैसे विवेकाधीन राहत के हकदार नहीं हैं। इसी आधार पर तहसील पांवटा साहिब निवासी दीपक कुमार, सौरव कुमार और गौरव कुमार की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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