सिरमौर में मक्की की फसल पर सुंडी ने बोला हमला
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से की दवा छिड़कने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
धौलाकुआं/नाहन (सिरमौर)। जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में मक्की की फसल की पैदावार होती है। खेती के लिए बारिश पर निर्भर अधिकतर क्षेत्रों के किसान बरसात के मौसम में मक्की सहित अन्य कई फसलों को बड़े स्तर पर उगाते हैं लेकिन सिरमौर में इस बार फिर मक्की की फसल पर सुंडी ने धावा बोल दिया है जिससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है।
बीते अप्रैल माह में जहां मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की फसल में सुंडी रोग लगने से किसानों को गेहूं की पैदावार में भारी नुकसान झेलना पड़ा था अब मक्की की खड़ी फसल को सुंडी ने कुतरना शुरू कर दिया है। यहां के अधिकतर ऊपरी क्षेत्रों में कफोटा शिलाई अंधेरी में मात्र मक्की की ज्यादा पैदावार होती है। जबकि पांवटा में धान और मक्की की सामान्य फसलें होती हैं। तीन चार सालों से फैल रहे इस रोग से किसान चिंतित हैं। अभी तो फसल एक महीना की हुई है जब तक फसल पकने को तैयार होगी तब तक तो सुंडी फसल का नामोनिशान ही मिटा देगी।
बता दें कि पांवटा क्षेत्र की मक्की की मांग साथ लगते हरियाणा में ज्यादा होने पर मक्की खेतों से निकलते ही यहां खरीदारों की आवाजाही बढ़ जाती है। शुरुआती दौर में सुंडी का प्रकोप कुडिया पंचायत में ज्यादा देखा जा रहा है। सुंडी रात के समय में फसल को खाना शुरू करती है। पौधे की गोभ के अंदर घुस कर जगह बना लेती है और दिन भर उसी में छिपी रहती है।
इस साल मानसून के देरी से आने से और ज्यादा गर्मी पड़ने के चलते सुंडी से ज्यादा नुकसान होने का किसानों को डर सता रहा है।
स्थानीय लोगों राकेश कुमार, रवि चौधरी, धर्म पाल आदि ने बताया कि पिछले साल मक्की के भुट्टे में सुंडी ने धावा बोल कर नुकसान पहुंचाया था। इस बार पौधे के पत्तों को ही सुंडी चट कर रही है।
उधर, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि किसान 6 एमएल कोरोजोन दवा एक पम्प में घोल कर साफ मौसम में शाम के समय जब सुंडी का बाहर निकलने का समय हो तो छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर 15 दिन में दोबारा छिड़काव कर सकते हैं।