100 रुपये प्रति क्विंटल दाम बढ़ा कर शुगर मिल के लक्ष्य का समीकरण बिगाड़ा
भजन चौधरी
धौलाकुआं (सिरमौर)। विकास खंड पांवटा साहिब में निजी चरखी संचालकों ने शुगर मिल का समीकरण बिगाड़ दिया है। एकाएक क्षेत्र में गुड़ बनाने वाली निजी चर्खियों के संचालकों ने गन्ना खरीद के दाम 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिए हैं। ऐसे में अब किसानों का रुझान निजी चर्खियों की तरफ हो गया है।
बता दें कि इस सीजन में उपमंडल के 150 किसानों ने उत्तराखंड में संचालित शुगर मिल में गन्ना बेचने के लिए पंजीकरण करवाया है। शुगर मिल को यहां से इस सीजन में एक लाख क्विंटल गन्ना देने का लक्ष्य रखा गया है। शुगर मिल में गन्ना खरीद पर सरकार ने 400 रुपये प्रति क्विंटल दाम निर्धारित किए हैं। वहीं अब निजी चरखी संचालकों ने 500 रुपये प्रति क्विंटल दाम दे कर किसानों से गन्ना खरीद शुरू कर दी है। पांवटा क्षेत्र के भुगरणी, शिवपुर, फूलपुर, ज्वालापुर आदि क्षेत्रों में दर्जन भर चर्खियों में गुड़ उत्पादन इन दिनों जोरों पर है। मोटे अनुमान में यहां हर रोज एक हज़ार क्विंंटल गन्ना पिराई कर गुड़ तैयार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि शुगर मिल अगर गन्ना खरीद बंद कर दें तब यहां पर गन्ना खपत का कोई और विकल्प नहीं है। मिल को चालू करने और बंद करने की तिथि पहले ही निर्धारित कर दी जाती है। उतने दिन तक चरखी संचालित कर रहे लोग किसानों को मोटे दाम दे कर गन्ना खरीद करते हैं। मिल के बंद होने पर यह किसानों से आधे दामों पर गन्ना खरीद शुरू कर देते हैं।
किसान सुरजीत सिंह, राकेश कुमार, रवि चौधरी और कुलदीप सिंह आदि ने बताया कि चरखी संचालक 490 से 510 रुपये प्रति क्विंटल दाम देकर नकद भुगतान कर रहे हैं। जबकि शुगर मिल से गन्ने का भुगतान देरी से होता है। इसलिए किसानों ने पंजीकरण शुगर मिल में गन्ना देने का किया और गन्ना निजी चरखी चालकों को दे रहे हैं। पांवटा से गन्ना भेज रही पांवटा केन ग्रोवर सोसायटी की ओर से अभी तक 18 हजार क्विंटल गन्ना खरीदकर मिल को भेज दिया है। वहीं गिरिपार के खोड़ोंवाला की शकुम्बरा सोसायटी की ओर से अभी तक 5,000 क्विंटल गन्ना भेजा गया है जो पिछले सालों की अपेक्षा बहुत कम है।
पांवटा की गन्ना सोसायटी के अध्यक्ष राकेश जंग ने बताया कि गुड़ उत्पादकों की ओर से किसानों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से कहा कि शुगर मिल ही यहां के गन्ना खरीद के लिए विकल्प है। गन्ना कम निर्यात होने पर शुगर मिल की ओर से अगर गन्ना खरीद बंद कर दिया गया तो चरखी संचालक मनमर्जी के दाम किसानों को देंगे।
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