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Sirmour News: अतिरिक्त कार्यभार से स्टाफ नर्सें हो रहीं तनाव का शिकार

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मेडिकल कॉलेज नाहन में स्टाफ नर्सों की कमी से सेवाएं प्रभावित, मरीज परेशान
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स्वीकृत 182 में से 100 खाली, 12-12 घंटे सेवाएं देने को मजबूर

संवाद न्यूज एजेंसी

नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में स्टाफ नर्सों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। नर्सिंग स्टाफ के अभाव में जहां मरीजों को समय पर उपचार और समुचित देखभाल नहीं मिल पा रही है, वहीं ड्यूटी पर तैनात नर्सें लगातार बढ़ते कार्यभार से जूझ रही हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई नर्सों को मजबूरी में 12-12 घंटे तक लगातार सेवाएं देनी पड़ रही हैं, जिससे वे मानसिक और शारीरिक तनाव का शिकार हो रही हैं।

दरअसल, मेडिकल कॉलेज नाहन में स्टाफ नर्सों के कुल 182 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से करीब 100 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। आधे से अधिक पद खाली होने के कारण अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। जैसे ही इमरजेंसी या गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ती है, पूरे सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बन जाता है और व्यवस्थाएं लड़खड़ा जाती हैं।
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नर्सिंग स्टाफ के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी भारी कमी है। कई वार्डों में दो-दो वार्डों के लिए केवल एक ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात है। ऐसे में ऑक्सीजन सिलिंडर लाना, मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना, स्ट्रेचर की व्यवस्था करना जैसे जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज में विभिन्न वार्डों में करीब 345 बिस्तर उपलब्ध हैं। गायनी, बाल रोग, मेडिसिन और सर्जरी वार्डों में मरीजों का दबाव सबसे अधिक रहता है। इन वार्डों में इंजेक्शन लगाने, दवाइयां देने, मरीजों की निगरानी और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ पर ही निर्भर है। खासकर गायनी, बाल और मेडिसिन वार्डों में अधिक संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं।

इमरजेंसी वार्ड में भी स्टाफ नर्सों की कमी के कारण आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे कई बार गंभीर मरीजों को समय पर पर्याप्त देखभाल नहीं मिल पाती। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज नाहन में रोजाना औसतन एक हजार से 1200 मरीज ओपीडी रहती है। मौसम में परिर्वतन के चलते संक्रमण व अन्य रोगों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, लेकिन सीमित स्टाफ के चलते उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और समुचित निगरानी नहीं मिल पा रही है।

मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लो ने बताया कि अस्पताल में रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रिक्त पदों की सूची उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
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उद्योगमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार गंभीर है। स्टाफ नर्सों की कमी का मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है। एक महीने के भीतर करीब 45 स्टाफ नर्सों की तैनाती मेडिकल कॉलेज में की जा रही है। संवाद
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