धारचूला में रं संग्रहालय को सामग्री सौंपते स्थानीय लोग
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ददाह (सिरमौर)। जिला भर में अपनी सेवाएं दे रहे एसएमसी शिक्षकों ने प्रदेश सरकार की नीतियों के प्रति गहरा रोष जाहिर करते हुए वेतन वृद्धि करने की मांग की है। रविवार को रेणुका में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए संघ जिलाध्यक्ष रविकांत शर्मा ने कहा कि एसएमसी शिक्षक जिले की विकट भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भी अपनी नियमित सेवाएं देते आ रहे हैं। जबकि सरकार एसएमसी शिक्षकों के प्रति सौतेला व्यवहार कर रही है। एसएमसी अध्यापकों को बढ़ते महंगाई के दौर में भी मात्र 35 सौ से 6 हजार रुपये तक का ही मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त एसएमसी शिक्षकों को राजकीय अवकाश व महिलाओं को मिलने वाले मातृत्व अवकाश से भी वंचित रखा जा रहा है।
जिले भर में 450 से अधिक एसएमसी शिक्षक दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एसएमसी शिक्षकों ने दूसरे शिक्षकों के मुकाबले 90 फीसदी वेतन देने की मांग करते हुए प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपा है। अपनी मांगों को लेकर संघ का एक प्रतिनिधि मंडल पहले भी शिमला में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मिल चुका है लेकिन प्रदेश सरकार ने उनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। बैठक में महेंद्र सिंह, चमनलाल, पंकज, किशन कुमार, सुनील, प्रतिभा, कुलदीप, सुलक्षणा, प्रेमलता व सुनीता सहित दर्जनों एसएमसी अध्यापकों ने भाग लिया।
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सुनील बने एसएमसी शिक्षक संघ के प्रधान
रविवार को आयोजित एसएमसी शिक्षकों की बैठक में संघ की ददाहू खंड इकाई का चुनाव किया गया जिसमें सर्वसम्मति से अमित शर्मा को अध्यक्ष, रक्षा तोमर व रोशन लाल को उपाध्यक्ष, सुनील चौधरी को महासचिव, भीमसिंह को सहसचिव, बहादुर सिंह को मुख्य सलाहकार, रमेश कुमार को सलाहकार, जगपाल तोमर को प्रेस सचिव व मुकेश कुमार को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।