रेणुका जी में वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर दो दिवसीय शिविर का आयोजन
प्रकृति का अनमोहन उपहार हैं वन्य जीव, संरक्षण जरूरी : रांटा
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। भारतीय वन्य प्राणी संस्थान (डब्ल्यूआईआई) व वन्य प्राणी मंडल शिमला ने वन्य जीव, जंतुओं को रेस्क्यू करके उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने का प्रशिक्षण दिया। वन्य प्राणियों के संरक्षण को लेकर वन्य प्राणी मंडल शिमला की यह एक अलग पहल है।
रेणुकाजी में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में तीन वन मंडल के कर्मचारियों को संस्थान के जीव विशेषज्ञों ने मानव जीवन के लिए घातक माने जाने वाले तेंदुआ, बाघ व सांप को रेस्क्यू करके उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की विधियों से अवगत करवाया। इसके अतिरिक्त कच्छुआ जैसी प्रजाति पानी से बाहर आकर कहीं फंसने कारण अपनी जान गंवा देते हैं। उन्हें भी रेस्क्यू करके सुरक्षित स्थान पर वापस छोड़ने का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के दौरान वन्य प्राणी विभाग के एसीएफ विनोद रांटा ने कहा कि हर वन्य जीव का अपना अलग-अलग स्वभाव है। प्रत्येक जीव प्रकृति का अनुपम उपहार है। मानव की तरह ही वन्य जीवों का जीवन भी अनमोल व बहुमूल्य है। जिस कारण जीव-जंतुओं व वन्य जीवों का संरक्षण बेहद जरूरी है। वन्य प्राणियों के जीवन को कैसे बचाया जा सके, इसे लेकर वन्य प्राणी विभाग अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर रहा है। ताकि किसी भी जीव को संकट से बचाने में इन कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सके।
इस दौरान प्रशिक्षण प्रभारी एवं जीव वैज्ञानिक डॉ. संगीता आगोम, डॉ. नीरज मेहर, डॉ. आदित्य शर्मा व डॉ. प्रोवी डोबरियाल सहित संस्थान से जुड़े अन्य जीव वैज्ञानिकों ने वन्य प्राणियों व जलीय जीव-जंतुओं को रेस्क्यू करने की तकनीक से वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया।
इस मौके पर डा. कार्तिक चौधरी, आरओ वन्य प्राणी दिव्या शर्मा, सुरेंद्र कुमार व सहायक जीव वैज्ञानिक सौरभ पुंडीर सहित वन्य प्राणी मंडल शिमला, वन मंडल रेणुकाजी व पांवटा साहिब से करीब 50 वन कर्मी मौजूद रहे।
रेणुका जी में सांप को रेस्क्यू करने का प्रशिक्षण देते वन्य प्राणी विभाग के एसीएफ विनोद रांटा। स